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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

मुक्तक (फुटकर)

मुक्तक (फुटकर)
पतझड़ वसंत होता है
१. भगवन की दया से विघ्नों का अंत होता है !
महिमा विहीन मानव फिर से महिमावंत होता है !
खुशिओं के फूल खिलते हैं ‘पथिक’ मुरझाये चमन में
प्रभु मेहरबान हो तो पतझड़ वसंत होता है !

अब तक ना किया पहले
२. तुझ पर संसार की खुशियां मैं कुर्बान कर दूँ
कौम की रूह पर तुमने वो असर डाला है !
जो दुनियां में किसी ने अब तक ना किया पहले
‘पथिक’ दिलों की मैल को तुमने साफ़ कर डाला है !

अंजाम देखोगे

३. किसी की दुनियां उजड़ने वालो
कभी तुम इसका अंजाम देखोगे !
‘पथिक’ मझदार में डूबा हुआ बेडा
अपनी ही नजरों से शरेआम देखोगे !

मुबारक हो
४. दिनेश आर्य पथिक जी गहरे चिन्तक और विचारक हो !
सौ वर्षों तक लम्बा जीवन जिओ धर्म गुणधारक हो !
सदा स्वस्थ नीरोग रहो या जीवन मंगलकारक हो !
‘पथिक’ आपके जन्म दिवस पर सौ सौ बार मुबारक हो !

संकलन कर्ता (पथिक भजन मञ्जूषा ) से
राजेन्द्र प्रसाद आर्य
संगरूर (पंजाब)
चलभाष: ०९०४१३४२४८३