Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

ऋषि दयानन्द को जाना नहीं

ऋषि दयानन्द को जाना नहीं

दुनिया ने दुनिया ने जाना नहीं-२ दयानन्द को-२।
दुनिया ने नहीं जाना ऋषि मस्ताना ,
सूखे में उसने किया सावन सुहाना।।

टंकारा से गूँजी इक टंकार नई।
कानों में सबके उसकी झंकार गई।।
कर गुण ग्रहण कमान सम्भाली वेदों की।
... हर्षित जग किया भेदी भावना भेदों की ।।
दुनिया ने ना पहचाना ऋषि वो दिवाना....

कभी हिमालय का बीहड़ जंगल छाना ।
संघर्षों को जीवन का मंगल माना ।।
कंकड पत्थर खाये सब दुःख दर्द सहा ।
सबको अमृत बांटा पर खुद जहर पिया।।
ऋषि के पथ पर है आना सारा जमाना......

ऋषि ने नारी जाति को सम्मान दिया ।
दलित शूद्र लोगों का था उत्थान किया।।
गउ आदि पशु वध को देख उदास हुए।
करके नूतन भाष्य सत्यार्थ प्रकाश किए।।
दुनिया ने आज-माना ऋषि का जमाना......

Sender:
Rajendra P.Arya
Sangrur (Punjab)
90413 42483