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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

डूबतों को बचा लेने वाले मेरी नैया है तेरे हवाले

डूबतों को बचा लेने वाले मेरी नैया है तेरे हवाले
पं सत्यपाल पथिक

डूबतों को बचा लेने वाले मेरी नैया है तेरे हवाले
लाख अपनों को मैंने पुकारा सब के सब खर गये हैं किनारा
... ओर कोई न देता दिखायी सिर्फ़ तेरा है सबको सहारा
कौन तुझ बिन भंवर से निकाले मेरी नैया है तेरे हवाले । .....

तूं जिसको बचाने को आये आग में भी बचा कर दिखाये
जिस पे तेरी दया द्रष्टी होवे उस पे कैसे भला आंच आये
आंधियों में भी तूं ही सम्भाले मेरी नैया है तेरे हवाले ॥ ....

प्रथ्वी सागर व पर्वत बनाए तू ने धरती पे दरिया बहाए
चान्द सूरज करोडों सितारे फ़ूल आकाश में भी खिलाए
तेरे सब काम जग से निराले मेरी नैया है तेरे हवाले ॥.....

बिन तेरे चैन मिलता नहीं है दीप आशा का जलता नहीं है
तेरी सत्ता बिना तो जहां में पथिक पत्ता भी हिलता नहीं है
तेरे बस में अन्धेरे उजाले मेरी नैया है तेरे हवाले ।....

डूबतों को बचा लेने वाले मेरी नैया है तेरे हवाले