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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

जिस घर में एक दूजे की बात जाए मानी

जिस घर में एक दूजे की बात जाए मानी
पं.विजयानन्द

जिस घर में एक दूजे की बात जाए मानी उस घर कभी न आए कोई भी परेशानी ॥
आकाश में नहीं है स्वर्गों की कोई दुनियां बेकार के भर्म में भटकी हुई है दुनियां ।
... वही घर है स्वर्ग जिसमें होति है मधुर वाणी ॥ उस ..
माता पिता की सेवा भी फ़र्ज है हमारा मां बाप से ही जग में नामों निशां हमारा ।
माता पिता की आग्या जाति जहां पे मानी ॥ उस ..
सन्तान पैदा करके जो आजाद छोड देते मां बाप एसे इक दिन सर को पकड के रोते ।
बच्चों पे शुरु से ही रखते जो निगहबानी ॥ उस ...
सन्तान जब बडी हो तो डण्डों से न मनाओ गर्मी को छोड कर फ़िर प्यार को अपनाओ।
जहां प्यार है वहीं है सुख चैन की कहानी ॥ उस ..
लाओ प्रयोग में न तराजू को शादियों में घर फ़ूंक डाले कितने " विजय" सौदे बाजियों।
समझें जहां बहू को ही दहेज घर के स्वामी ॥ उस..

Sender:
Rajendra P.Arya
Sangrur (Punjab)
9041342483