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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

मां की पुण्य स्मृति पर

मां की पुण्य स्मृति पर
तर्ज: यहाँ बदला वफ़ा का बेवफाई के सिवा क्या है !
कहाँ हो मां तुम्हें तेरे दुलारे याद करते हैं,
यह टुकड़े जिगर के आँखों के तारे याद करते हैं !
जहाँ में छिन गया हम से तुम्हारे प्यार का दामन,
तुम्हें मायूस हाथों के इशारे याद करते हैं !
हमारे वास्ते तुम तो बनी थी कल्प की छाया,
दिए दिन रात जो तुमने सहारे याद करते हैं !
कहाँ बाहों का वह झूला कहाँ वह गोद मखमल सी ,
जहाँ बचपन के दिन हमने गुजारे याद करते हैं !
हज़ारों कष्ट सह कर भी सुखी हमको किया तुमने,
पिघल जाता है दिल जब वह नज़ारे याद करते हैं !
अनेकों बार मां तुमने जिन्हें आँचल से पोंछा है,
बरसते अब वही आंसू हमारे याद करते हैं !
जहां भी तू छुपी है मां कहीं से भाग कर आजा ,
बड़ी हसरत से यह बच्चे तुम्हारे याद करते हैं !
यहाँ हर चीज मिलती है मगर इक मां नहीं मिलती ,
बिछड जाती है मां जिनकी वह सारे याद करते हैं !
उमर भर प्यास का आलम ना देखा हो किनारों ने ,
नदी जब सूख जाए तो किनारे याद करते हैं !
समझते हैं गया प्राणी कभी वापिस नहीं आता,
“पथिक” हम क्या करें ममता के मारे याद करते हैं !