Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

बंदे तेरी है यही बन्दगी (Pathik)

देख बंदे तेरी है यही बन्दगी , तू किसी जिव को भी सताया न कर |

न किसी पे जरा सी दया कर सके , तो जुलम भी किसी पे तू डाया न कर |

इन पशु पक्षियों को तू मारा न कर , मौत के घाट इन्हें उतारा न कर |

अपनी छः इंच लम्बी जुबाँ के लिए, बेजुबानो पे छुरियां चलाया न कर |

इन बेचारो ने तेरा बिगाड़ा है क्या ? कोई घर बार तोड़ा उजाड़ा है क्या ?

... तू घड़ी दो घडी की लहर के लिए , इन गरीबो के खूँ से नहाया न कर |

निरपराधो को तकलीफ देता है क्यों ? जिन्दगी दे सके न तो लेता है क्यों ?

जग में जीने का इनको भी अधिकार है, बेरहम इनका जीवन मिटाया न कर |

जैसे बच्चे है सब लाडले आप के , ये भी वैसे ही प्यारे है माँ बाप के |

छीन बच्चे किसी के “ पथिक “ मारकर, अपने बच्चो को हरगिज खिलाया न कर |

Rajendra P.Arya
Sangrur (Punjab)
9041342483