Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

तन के उजले मन के काले

तन के उजले मन के काले उनको सुन्दर मै न कहूँगा |
पड़े बुद्धि पर जिनके ताले पशु हैं वे नर मै न कहूँगा ||
निराकार प्रभु अजर अमर है चरम चक्षु से प्रभु नजर न आए|
है यह मनुज एक देशी जो तन धारे जन्मे मर जाए ||
वह जड़ प्रतिमा जिसको मानव गढ़कर मंदिर में बिठलाए |
चोर चुरा ले जाए रक्षा अपनी आप न जो कर पाए ||
नाशवान उस नर को अथवा जड़ को ईश्वर मै न कहूँगा |
पड़े बुद्धि पर जिनके ताले पशु हैं वे नर मै न कहूँगा ||
वृ...क्षों में जामुन, पतली बेलों में है तरबूज लगाता |
हंसी उड़ाता है नास्तिक देखो कैसा है मूढ़ विधाता ||
बड़े वृक्ष में कहीं बड़े तरबूज लगा देता निर्माता |
गिरता कहीं नाक पर तेरे हुलिया सब चौपट हो जाता ||
कार्य सभी विधिवत विधि के हैं, भूल भयंकर मै न कहूँगा |
पड़े बुद्धि पर जिनके ताले पशु हैं वे नर मै न कहूँगा ||
रहा अखंड ब्रह्मचारी जो स्वामी रामचंद्र के कारण |
रावण का अभिमान मिटाया किए राम के विघ्न निवारण ||
हाथ गदा, यज्ञोपवीत कांधे पर किए हुए था धारण |
हुए राम थे परम मुग्ध सुनकर जिसका संस्कृत उच्चारण ||
उस हनुमान वीर ज्ञानी द्विज-वर को बन्दर मै न कहूँगा |
पड़े बुद्धि पर जिनके ताले पशु हैं वे नर मै न कहूँगा ||
उपदेश समर में सकल मोह अर्जुन का टाला |
रुक्मणि-सहित वर्ष बारह लौं ब्रह्मचर्य हिमगिरी में पाला ||
फिर गृह-आश्रम में जन्माया सुत प्रद्युमन सा सद्गुण वाला |
था वह कृष्ण असुर-संहारक योगेश्वर नीतिज्ञ निराला ||
चोर जार गोपीबल्लभ उसको राधावर मै न कहूँगा |
पड़े बुद्धि पर जिनके ताले पशु हैं वे नर मै न कहूँगा ||
कहते चेले गुरूजी आशीष देकर सुत जन्मा देते हैं |
जितना दे कोई सोना उसका दस गुना थमा देते हैं ||
सोना साथ लिए नर-नारी चरणों में शीश नमा देते हैं |
खिसके वे चुपचाप गृह की भी संपत्ति गवां देते हैं ||
यूँ धन धर्म गंवाओ उनके पास पहुंचकर मै न कहूँगा |
पड़े बुद्धि पर जिनके ताले पशु हैं वे नर मै न कहूँगा ||

Sender: Rajendra P.Arya
Sangrur (Punjab)
9041342483