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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

सभा में वार्तालाप करने के नियम महर्षि के अनुसार

प्रश्न
जब-जब सभा आदि व्यवहारों में जावें तब-तब कैसे-कैसे
वर्तें ?
उत्तर
जब सभा में जावें तब दृढ़ निश्चय कर लें कि मैं सत्य
को जिताऊं और असत्य को हराऊंगा । अभिमान न करें,
अपने को बड़ा न मानें । अपनी बात का कोई खण्डन करे
उस पर क्रुद्ध वा अप्रसन्न न हो । जो कोई कहे
उसका वचन ध्यान देकर सुन के जो उसमें कुछ असत्य भान
हो तो उस अंश का ख्ण्डन अवश्य करें और जो सत्य
हो तो प्रसन्नतापूर्वक ग्रहण करें । बड़ाई छोटाई न गिने,
व्यर्थ बकवाद न करें न कभी मिथ्या का पक्ष करें और सत्य
को कदापि न छोड़ें । ऐसी रीति से बैठे वा उठे
कि किसी को बुरा विदित न हो । सर्वहित पर
दृष्टि रक्खे, जिससे सत्य की बढ़ती और असत्य का नाश
हो उसको करे, सज्जनों का संग करें और दुष्टों से अलग रहे,
जो जो प्रतिज्ञा करे वह वह सत्य से विरुद्ध न हो और
उसको सर्वदा यथावत् पूरी करे । इत्यादि कर्म्म सब
सभा आदि व्यवहारों में करें ।
=व्यवहारभानु