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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

जीवन नैय्या

जीवन नैय्या
ओम् सुत्रामाणम् पृथवीं द्दामनेह्सम् सुशर्माणमदितिम सुप्रणीतिम !
देवीं नावं स्वरित्रामनागसमस्त्र्वंतीमा रूहेमा स्वस्तये !
हम स्वयं पार हो जायेंगे, तुम कृपा करो कुछ खेवैय्या !
जिससे पार उतर जाएँ, दे दो हमको ऎसी नैय्या !!
तन तरणी तुमने हमको दी
ये संतरणी प्रति रक्षक दी !
इस धरती पर कर द्दौ प्रकाश
सुख करणी सुन्दर हमको दी !
हो जाय न इसमें छेद कहीं, डूबे न कभी मेरी सैया !
जिससे पार उतर जाएँ, दे दो हमको ऎसी नैया !!
भली भांति निर्माण हुआ हो
त्रुटि विहीन उत्थान हुआ हो !
बन गई दिव्य प्रभु रचना यह
और स्वस्ति प्रस्थान हुआ हो !
अपराध रहित यह बनी रहे, संताप नहीं दे यह भैया !
जिससे हम पार उतर जाएँ, दे दो हमको ऎसी नैया !!
गतिमान मन्त्र बल का धौंका
क्षति छिद्र नहीं दें क्षण चौंका !
कर सके आत्म सुख आरोहण
भवसागर पार करे नौका !
कल्याण हमें दे जाए रे, ये छत छैया बने उछैया !
जिससे हम पार उतर जाएँ, दे दो हमको ऎसी नैया !!

राजेन्द्र आर्य
संगरूर (पंजाब)
9041342483