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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

श्रुति श्रेय सार यज्ञोपवीत

श्रुति श्रेय सार यज्ञोपवीत
ओ३म् यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजम् पुरस्तात
आयुष्यमग्रयम् प्रतिमुंच शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः !!
ओ३म् यज्ञोपवीत यज्ञोपवीतमसि यज्ञस्य त्वा यज्ञोपवीतेनोपह्यामि !!

वेदोक्त कर्म शुभ यज्ञ हेतु, अधिकार चिह्न यज्ञोपवीत !
यह तार-तार है धर्म सार, श्रुति श्रेय सार यज्ञोपवीत !!
स्कंध सुद्रढ़ स्थापित है
यह ब्रहम सूत्र पावन महान !
पिता प्रजापति उपदेशों से
यह हुआ सूत्र हमको प्रदान !
परमात्म ज्ञान का सूचक है, रखता पवित्र यज्ञोपवीत !
यह तार-तार है धर्म सार, श्रुति श्रेय सार यज्ञोपवीत !!
निर्देश रूप में मूर्तिमान
आयुष्य हेतु हितकारी हो
यह निर्मल सूत्र धारता हूँ
बल प्राप्त तेज उपकारी हो !
सत्कर्म मर्म का दाता है, जीवन को करता है पुनीत !
यह तार-तार है धर्म सार, श्रुति श्रेय सार यज्ञोपवीत !!
हे ब्रह्म सूत्र यज्ञोपवीत
मैं तुझको धारण करता हूँ,
कर्तव्य ग्रंथि मख गुंथित मैं
यज्ञोपवीत से बंधता हूँ !
हर समय सजग यह रखता है, हर समय जगाए धर्मजीत !
यह तार-तार है धर्म सार, श्रुति श्रेय सार यज्ञोपवीत !!
(गीताहुती : प्रणेता देव नारायण भारद्वाज ‘देवातिथि’ )
प्रेषक:
राजेन्द्र आर्य
संगरूर (पंजाब)
9041342483