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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

सत्यार्थ प्रकाश से रोजड़ वाले विवेकानन्द परिव्राजक की निर्बीज समाधि का खण्डन

नमस्ते आर्य्यगण,
इस बार मैं पाखण्डी संन्यासी स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक
(रोजड़ वाला) की निर्बीज समाधि का खण्डन करूँगा। सन 2011 में
विवेकानन्द ने मेरी समाधि का खण्डन किया और दूसरा वेद
विरोधी असम्प्रज्ञात समाधि उत्पन्न करने को कहा(मुझे उस समय
पता नहीं था की वो वेद विरोधी है क्यूंकि मैंने वेदों का अध्ययन
नहीं किया था) विवेकानंद ने मेरे वैराग्य का खण्डन करते हुए
कहा की असम्प्रज्ञात समाधि
तो बहुत दूर की बात है आप अभी तक वैराग्य को ही नहींसमझे ।
इसके बाद मैंने पूछा की क्या गौतम बुद्ध का वैराग्य सच्चा था ?
विवेकानन्द बोला गौतम बुद्ध का वैराग्य सच्चा तो था लेकिन
अधूरा था वे अपर वैराग्य तक थोड़ा पहुंचे पर वैराग्य का अभ्यास
ठीक से नहीं करने के कारण ईश्वर तक नहीं पहुँच सके। इसके बाद मैंने
गौतम बुद्ध का वैराग्य उत्पन्न किया इतना वैराग्य उत्पन्न
किया की रोजड़ के
बाप दादाओं ने सपने में भी नहीं सोचा होगा। मुझे याद है की उस
अवस्था में मुझे सब संसार दुखरूप लग रहा था । महर्षि दयानन्द
जी ने सत्यार्थ प्रकाश में इसका खण्डन किया है। Attachment में
प्रमाण है उसे देखें ।
धन्यवाद
See attachment in this link
http://groups.yahoo.com/group/aryasamajonline/message/23398