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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

ह्रदय में ब्रह्म की प्रकटता प्राप्त करने के उपाय

१. प्रमाणों का प्रमाण करो। अर्थात शुद्ध मन से विचार करना की ऋषि मुनियों ने जो प्रमाणों का वर्णन किया है वह वास्तव में सत्य है अथवा नहीं। ईश्वर का सीधे प्रमाण नहीं होगा। अन्य पदार्थों पर अनुभव कीजिये। उदाहरणार्थ सब्जी मंडी में जाके किसी सब्जी को प्राप्त करने में प्रमाणों का उपयोग करें । आलू यहाँ इस विक्रेता के पास नहीं है तो जहाँ है वहां जाइये। अभाव प्रमाण । इसी प्रकार ईश्वर के विषय में भी चिंतन करिए । क्या ईश्वर को पाया जा सकता है ?
२. कारण के विना कार्य्य नहीं होता। इस पर शुद्ध पवित्र मन से चिंतन करिए। क्या Laptop के Power button को दबाये विना वह Start हो जायेगा ? क्या विना ऊर्जा के लैपटॉप कार्य्यरत है ? क्या विना चेतन कर्त्ता के लैपटॉप का निर्माण हुआ है ?
३. अपने कर्त्तव्य पर चिन्तन करिए। जो व्यक्ति अपने कर्त्तव्य कर्मों को आलस्य अथवा प्रमाद से छोड़ देता है उसकी मुक्ति नहीं होगी ।
४. सत्यार्थ प्रकाश में कर्मों की गति को पढ़िए। कैसे गुण रखने से कैसी गति होगी इत्यादि।
५. ऋग्वेदादि भाष्य भूमिका में लिखा है - ज्ञान से ही मोक्ष होता है। वेदों में लिखा है - विद्या अमृत है।
६. आगे आप स्वयं आत्मचिंतन करें की मुक्ति कैसे होगी।
७. ऐसे सन्यासियों से दूर रहना जो क्रोधी, लालची, द्वेष करने वाले हैं जो वेद विरुद्ध आचरण करने में लिप्त हैं। उनके उपदेशों को किसी कारणवश मानना मत ! भले ही वो समाधि की बात करें। ऐसे लोग आपको अपने जैसा बना लेंगे। उनके उपदेशों को मानने की त्रुटी स्वप्न में भी मत करना ! उनके अवगुण आपमें आ जायेंगे और परमात्मा नाराज होकर आपके ह्रदय से चले जायेंगे। परमात्मा का नियम अटल है उसे कोई भी नहीं तोड़ सकता !

ॐ.. ह्रदय से

ॐ.. ह्रदय से ब्रह्म की प्रकटता जाने से Negative symptoms of schizophrenia होता है।