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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

प्रात: काल में रत्नों की प्राप्ती

प्राता रत्नं प्रातरित्वा दधाति || ऋ. 1/125/1

प्रात: काल जागने वाला ही प्रभात वेला में रत्नों (शुभ गुणो ) को धारण करता है | ऐश्वर्य को प्राप्त करता है |