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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

सरस्वती संवाद

सरस्वती संवाद

ओ३म सरस्वती देवयन्तो हवन्ते सरस्वतीमध्वरे तायमाने I
सरस्वती सुक्रतो हवन्ते सरस्वती दाशुषे वार्यदात ई

सरस्वती अभिलाषा तुमसे I संवाद करो माता हमसे ई
बात करो मेरी माँ हमसे !!

१. जो तुमने हमको शब्द दिए, वही हमारे ये गीत हुए !
दिव्यता देन लेकर आयी माँ, सरस्वती तब शक्ति प्रिये !
हो रहा तृप्त तेरे रास से, बात करो मेरी माँ हमसे ......३

२. तुमने ही हमें सिखाया है, वह हमने यज्ञ रचाया है !
जग में ध्रुव धर्म अहिंसा का, माँ सरस्वती फैलाया है!!
सब को सहयोग मिले सबसे, बात करो मेरी माँ हमसे.....३

३. मख वेदी अतिशय संवेदी, शुभ कर्मों की महिमा भेदी !
अवसाद प्रमाद सभी हरती, माँ सरस्वती सुकृत श्वेदी !!
पुरुषार्थ लब्धि से नर विहंसे, बात करो मेरी माँ हमसे ....३

४. जीवन में धन स्वत्व कमाया, किया दान परमार्थ बढ़ाया !
तप त्याग योग आरोग्यमोद , माँ सरस्वती ने बिखराया !!
हर ओर ऐश्वर्य सुख बरसे ! बात करो मेरी माँ हमसे .....३

५. गुरु ज्ञानवती श्री वाकवती, जग जननी सी अनुरागवती !
निज पावन मधुर लोरियों से, माँ सरस्वती यश बल भरती !!
प्रभु मग से जग संसृति सरसे, बात करो मेरी माँ हमसे ....३

(प्रेरक रचना : देव नारायण भारद्वाज )

राजेंद्र आर्य
३६२-ऐ, गुरु नानक पूरा,
सुनामी गेट, संगरूर-१४८००१ (पंजाब)
चलभाष: ९०४१३४२४८३

Submitted by Rajendra P.Arya

Submitted by Rajendra P.Arya on Mon, 2015-03-16 12:47. साम वन्दना
सरस्वती संवाद

ओ३म सरस्वती देवयन्तो हवन्ते सरस्वतीमध्वरे तायमाने I
सरस्वती सुक्रतो हवन्ते सरस्वती दाशुषे वार्यदात !

...सरस्वती अभिलाषा तुमसे I संवाद करो माता हमसे !
बात करो मेरी माँ हमसे !!

१. जो तुमने हमको शब्द दिए, वही हमारे ये गीत हुए !
दिव्यता देन लेकर आयी माँ, सरस्वती तब शक्ति प्रिये !
हो रहा तृप्त तेरे रास से, बात करो मेरी माँ हमसे ......३

२. तुमने ही हमें सिखाया है, वह हमने यज्ञ रचाया है !
जग में ध्रुव धर्म अहिंसा का, माँ सरस्वती फैलाया है!!
सब को सहयोग मिले सबसे, बात करो मेरी माँ हमसे.....३

३. मख वेदी अतिशय संवेदी, शुभ कर्मों की महिमा भेदी !
अवसाद प्रमाद सभी हरती, माँ सरस्वती सुकृत श्वेदी !!
पुरुषार्थ लब्धि से नर विहंसे, बात करो मेरी माँ हमसे ....३

४. जीवन में धन स्वत्व कमाया, किया दान परमार्थ बढ़ाया !
तप त्याग योग आरोग्यमोद , माँ सरस्वती ने बिखराया !!
हर ओर ऐश्वर्य सुख बरसे ! बात करो मेरी माँ हमसे .....३

५. गुरु ज्ञानवती श्री वाकवती, जग जननी सी अनुरागवती !
निज पावन मधुर लोरियों से, माँ सरस्वती यश बल भरती !!
प्रभु मग से जग संसृति सरसे, बात करो मेरी माँ हमसे ....३

(प्रेरक रचना : देव नारायण भारद्वाज )

राजेंद्र आर्य
३६२-ऐ, गुरु नानक पूरा,
सुनामी गेट, संगरूर-१४८००१ (पंजाब)
चलभाष: ९०४१३४२४८३