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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

सिक्ख गुरू और यज्ञोपवीत संस्कार ( जनेऊ ) :--

सिक्ख गुरू और यज्ञोपवीत संस्कार ( जनेऊ ) :--

ਤਿਲਕ ਜੰਝੂ ਰਾਖਾ ਪ੍ਰਭ ਤਾਕਾ । ਕੀਨੋ ਬਡੌ ਕਲੂ ਮਹਿ ਸਾਕਾ ।। ( ਵਿਚਿਤੱਰ ਨਾਟਕ 5/13 )
अर्थ :- उनके ( गुरू तेग बहादुर जी के ) ...तिलक जनेऊ की रक्षा प्रभु ने स्वयं की ।

दिल्ली के लाल किला में गुरू तेग बहादुर जी का चित्र है । उस चित्र में उनके माथे पर गोल बिंदु का तिलक है ।

यही बात आगे ज्ञानी ज्ञान सिंह जी ने पंथ प्रकाश में लिखी है :--

ਜਾ ਦਿਨ ਤੇ ਗੁਰੂ ਸਾਕਾ ਕਰਿਉ । ਵਿਪਤਾ ਵਿੱਚ ਨੌਰੰਗਾ ਰਹਿਉ ।
ਹਿੰਦੂ ਤੁਰਕ ਨਾ ਕਰਨੇ ਪਾਇਉ ਤਗ ਤਿਲਕ ਗੁਰੂ ਰੱਖ ਦਿਖਾਇਉ ।। ( ਪੰਥ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਪੰਨਾ 445 )

आगे ज्ञानी जी ने गुरू गोविंद सिंह जी के विवाह प्रकरण में लिखा है :--

ਪੀਤ ਪੁਨੀਤ ਉਪਾਰਨਾ ਧੋਤੀ ਰਵਿ ਨਵ ਛਵਿ ਛਾਜੇ ।
ਪੀਤ ਜਨੇਉ ਮਨੋ ਵਦਨ ਸਸਿ ਪੈ ਵਿਜਰੀ ਵਿਜੁਰੀ ਭ੍ਰਾਜੈ ।। ( ਪੰਥ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਪੰਨਾ 510 )

इसमें ज्ञानी जी ने साफ ही ( ਪੀਤ ਜਨੇਉ ) पीत जनेऊ लिखा है जिससे स्पष्ट है कि गुरूजन जनेऊ धारण करते थे ।

आगे संस्कार विधी में ऋषि दयानंद लिखते हैं :--

अष्टमें वर्षे ब्राह्मणमुपनयेत् । गर्भाष्टमे वा । एकादशे क्षत्रियम् । द्वादशे वैश्यम् ।।

आठवें वर्ष में ब्राह्मण का । ग्यारवें में क्षत्रिय का । बाहरवें में वैश्य का यज्ञोपवीत हो जाना चाहिए ।

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Rajendra P.Arya
Sangrur
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