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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

ऋषि का दिया एक अनमोल मन्त्र

हम न रोटी के लिए धन्यवाद करते हैं, भगवान को, न मक्खन के लिए | वह तो जीवन देने वाला है, हम उसे बस याद करते हैं, उसको अपने अन्धेरे मन में बिठा लेने के लिए | उसमे प्रकाश करने के लिए | अपने तन को, उसके उपकारों को पूरी तरहं से ग्रहण करने योग्य, तैयार करने के लिए | अपनी आत्मा के आनन्द के लिए | ऋषी ने हमें एक अनमोल मन्त्र दिया -

" आत्मा पकृति व परमात्मा दोनों से अलग एक नित्य व चेतन सत्ता है |"

इस मन्त्र को यदि हमने समझ लिया तो कोई हमें सबसे आगे बढ़ने से कदापी न रोक पाएगा | आप पूछेंगे, क्यों ?

क्योंकि आत्मा अब अपने आप को शरीर नहीं समझेगा | वह जड़ मन, बुद्धि व तन आदि के बन्धन से अपने आप को अलग जानेगा | उसे शरीर के सुख व दुख विचलित नहीं कर पाएँगे | वह उनका नियन्त्रक बन काम करेगा | इसी प्रकार वह अपने आप को भगवान मानकर मद्, अहंकार से युक्त नहीं हो जाएगा, न ही वह कर्महीन बन अज्ञानता का प्रचार करेगा | इसके अतिरिक्त आपको परमात्मा को पाने की उत्कट् इछा पैदा होगी |

वास्तव में हम जब प्रभु से प्रार्थना करते हैं, तब भी हम अपने को शरीर मानते हुए ही करते हैं | तो भगवान हमें और क्या देगा ? जो उसने देना है, वह तो उसने दिया ही हुआ है | हमें चाहिए कि हम प्रभु को मिलने के समय तन से अलग होकर विचारें, ताकि हम अपने तन मन को चुस्त, दरुस्त बना सकें | इसको करने के लिए उपरोक्त मन्त्र बहुत सहायक होगा | जो करके ही आप जान सकेंगे |
इसको सिद्ध करने के लिए संध्या के मन्त्र अत्यन्त उपयोगी हैं | इनके द्वारा आप अपने को, तन के अंगो व परमात्मा से अलग जानते हुए, परमात्मा का, तन मन को स्वस्थ, बलवान व प्रभु के गुणो के अनुरूप बनाने के लिए जाप,प्रार्थना व ध्यान करते हैं | आप हर पल तब तन व परमात्मा से अलग हो, तन को त्याग, परमात्मा की गोदी को धारण कर सकेंगे | अन्यथा परमात्मा का नाम लेना केवल तोता रटन्त ही बना रहेगा | उससे आपका कुछ अधिक बनने वाला नहीं |

When you are having your own identity, separate from Nature and God, then you have a confidence of your ATMIC SHAKTI capable of doing miraculous things from this God given miraculous body and you also become aware of a lot of help that is available naturally to you from God.. You lose the fears of this body to the great extent. The achievements will be much more easy than , when you take yourself as a body and also with the highest efficiency ever possible.