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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

यजु: 36/1

ओ3म् ऋचं वाचं प्र पद्दे मनो यजु प्र पद्दे
सामं प्राणं प्र पद्दे चक्षु: श्रोत्रम् प्र पद्दे |
वागोज: सहौजो मयि प्राणपानौ || यजु: 36/1
वाणी रूप ऋग्वेद, मन रूप यजुर्वेद, प्राण रूप सामवेद , उत्तम नेत्र और श्रेष्ठ कान रूप अथर्ववेद
अर्थात ऋग्वेद से शून्य व्यक्ति गूंगा
यजुर्वेद से शुन्य व्यक्ति ठून्ठ
सामवेद से शुन्य व्यक्ति प्राणहीन
अथर्ववेद से शुन्य व्यक्ति अन्धा और् बहरा
इसलिये चारों वेद स्वाध्याय करना आवश्यक ही है |

राजेन्द्र आर्य 9041342483

bahut badhiya.....

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