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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

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*धर्म चर्चा--- जिज्ञासु और मनीषी*

जिज्ञासु---
आप लोग मूर्ति के बिना ईश्वर का स्मरण, भजन, पूजन और ध्यान कैसे करते हैं ???

मनीषी---
ऋषि-मुनियों के कथनानुसार प्रत्येक व्यक्ति को ईश्वर की स्तुति उपासना और ईश्वर से प्रार्थना अवश्य करनी चाहिए | स्मरण, भजन, पूजन और ध्यान के सम्बन्ध में हमारा मानना यह है कि...

#ईश्वर द्वारा रचित जड़-जंगम सृष्टि को देखकर उसका *स्मरण* ||

#उसके (ईश्वर के) गुणों का गान करना उसका *भजन* ||

#उसके आदेशों का पालन करना उसका *पूजा* ||

#अपने मन को सांसारिक विषयों से विरक्त करना उसका *ध्यान* कहलाता है ||

इन सबके लिए किसी मूर्ति की कोई आवश्यकता नहीं होती है ||

जो व्यक्ति ईश्वर के आदेशों को नहीं मानतें वे ईश्वर का अपमान करते हैं, उसकी पूजा नहीं | वैदिक परम्परा में *स्तुति, प्रार्थना और उपासना* का विधान है |

ये तथाकथित पूजा-पाठ, जागरण किर्तन आदि तो अवैदिक मत पन्थों ने सिखाये हैं |

__/\__ आर्ष दर्पण ✍