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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

एक भारतीय की अमर शहीद मोहन चन्द्र शर्मा को विदाई

आज विदायी देते तुमको
ओ अमर शहीद!, ओ शक्तिमान!
अमर शहीद Mohan Chand Sharma
ओ वीर बहादुर देशभक्त!
तुम थे भारत के स्वाभिमान!

इस देश के दुश्मन, दुष्टों को
निरपराध जनों के भक्षक को
तुमने न्योंछावर कर, अपने प्राण
कर दिये दाँत, खट्टे उनके
जो भारत पर छाये, बन शैतान

कितने ही शत्रू अरिदल को
थी धूल चटाई, जीवन भर
अब तुम्हीँ चले, तज कर भारत
कर रहे, छोड़ सबको, प्रयाण

हम भूल न पायेगें तुमको
अब सदा तुम्हें हम देखेंगे
नभ पर, चमकोगे ध्रुव समान!

तुम प्रेरक बन इस भारत के
अनगिनित युवा और बच्चों के
मन‌ पर ऐसे छा जाओगे
भर दोगे नव जीवन उनमें
उत्साह नया और स्वाभिमान

ऐ वीर! छोड़, भरे पूरे घर को
किस और किया, तुमने प्रयाण
पत्नि और बच्चे, अश्रु भर
छलके जो, जैसे गंगाजल
कर रहे नमन, कर रहे विदा
संग उनके, एक समुद्र बना
भारत विराट के जन जन का
उमढ़ा है करने, तुम्हें विदा

ओ भारत के अमर वीर सपूत!
शहादत का तुमने
एक नया इतिहास रचा
सौ बार करें तुमको प्रणाम
मन में ले यादों की माला
आखोँ में भर भर अश्रुजल

आज विदायी देते तुमको
ओ अमर शहीद!, ओ शक्तिमान।
ओ वीर बहादुर देशभक्त!
तुम हो, भारत के स्वाभिमान! ||