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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

pathik bhajan-om

जो

जो अंग्रेजी तोते है ।
सुबह देर तक सोते है ।।
मजा सुबह का क्या जाने
जो दोपहर को मुंह धोते है ।

आलस और बढाते है
सुस्ती मे पड जाते है
नही स्वस्थ रह पाते है
बीमारी के बीज नए
अपने तन मे बोते है ।