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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

Bhupesh Arya's lekh

*जो लोग

*जो लोग ईश्वर को चौथे और सातवें आसमान पर मानते हैं वे भी भारी भ्रम में हैं।इस अशुद्ध एवं दूषित कल्पना से भी पाप को प्रोत्साहन मिलता है।कैसे ? सुनिए-*

*एक दिन किसी पादरी को एक डाकू मिल गया।डाकू ने कड़ककर कहा, "जो कुछ है यहाँ रख दे !"पादरी ने उसे उपदेश देना आरम्भ किया और कहा, "ईश्वर से डर !" डाकू ने पूछा, "ईश्वर कहाँ रहता है?" पादरी ने कहा, "चौथे आसमान पर ।"डाकू ने कहा, "वहाँ से आने में तो उसे काफी समय लगेगा,इतनी देर में तो मैं भाग जाऊँगा ।"यह कहकर उसने पादरी का सारा धन छीन लिया और भाग गया।*

यदि ईश्वर के वास्तविक स्वरुप को समझकर उसे सर्वद्रष्टा,सर्वव्यापक और सर्वनियन्ता स्वीकार कर लिया जाए तो मनुष्य पापों से बच सकता