Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

YOGESHWAR KRISHNA JAB MUJHE BAHUT YAAD AAYE

योगेश्वर श्रीकृष्ण जब मुझे बहुत याद आए

सुधा सावंत

कहते हैं हमारा मस्तिष्क भी एक बहुत उत्तम कोटि का कम्प्यूटर है। कहीं
एक बटन दबा और भूतकाल में प्राप्त सारी जानकारी एक बटन दबाते ही सामने
आजाती है ।ऐसा ही कुछ आज सुबह एक समाचार पढ कर हुआ कि एक वृद्ध पिता चार
दिन से रोज रोज बैंक जा रहा था किंतु बैंक से पैसा नहीं मिल रहा था अपने
500,या 1000, रु. के नोट नहीं बदलवा पा रहा था.। हार कर चौथे दिन भी जब
उसे पैसा नहीं मिला ,तो घर आकर उसने अपने दो पुत्रों की,जो सो रहे थे
,हत्या कर दी ।पढकर बडा दुख हुआ कि ऐसी स्थिति क्यों आई ,बैंकों में
लाईनें इतनी लम्बी क्यों हो रही हैं ,तभी उत्तर मिला ,मोदी जी ने
भ्रष्टाचार के विरुद्ध अभियान छेडा है काले थन को नष्ट करना है । परंतु
काला धन जमा करने वाले भी कोई नौसिखिए तो नहीं हैं ,उन्होंने अपने
नौंकरों और कार्यकर्ताऔं के बीच अपने लाखों रुपए बांट दिए हैं .कि जब नए
नोट आ जाएंगे तो कुछ प्रतिशत वे उन्हें दे देंगे बाकी वे स्वयं रख लेंगे।
तो लाइन में लगे ऐसे बेकारों की तो कोई कमी नहीं है और असली जरूरत मंद को
पैसा नहींमिल पा रहा है . सरल लोग जल्दी निराश हो जाते हैं इसलिए ऐसा कदम
उठा लेते हैं ।और दुष्ट लोग हर सही कदम को गलत साबित करने में लगे रहते
हैं । वे फल फूल भी रहे हैं । संसार का यह कैसा नियम है ।

तुरंत योगेश्वर श्री कृष्ण के जीवन की घटनाएं सामने आने लगीं ।
जन्म से ही उन्होंने अत्याचारी मामा कंस के दुराचार को सहा था ।जब जरा
बडे हुए तो बालकों की टोली बनाकर उन्होंने योजना बनाई कि वृन्दाबन
वासियों का दूध दही माखन मथुरा के अत्याचारी शासक कंस के पास नहीं जाने
देंगे ।उससे असहयोग करने की ठान ली ।वे मथुरा जाने वाली गोपियों का
दही-माखन या तो खुद ग्वाल-बालों में बांट कर खा लेते थे या गोपियों की
मटकियां तोड देते थे ।भावना थी कंस के दुराचार को समाप्त करने की ,उसकी
नीतियों से असहयोग करने की।तो लोगों ने श्री कृष्ण को ही माखन चोर-मटकी
फोड के रूप में चित्रित करना शुरू कर दिया ।

श्री कृष्ण ने तो अत्याचार को समाप्त करने का बीडा उठाया था ,अत वे
स्वयं अपने आप को मजबूत बनाने ,शक्तिशाली बनाने में लग गए। वे स्वयं भी
मल्लयुद्ध,आदि की शिक्षा लेने लगे, उनके बडे भाई तो मल्लयुद्ध की कला में
पारंगत थे ही ।कुछ समय बाद कंस ने श्रीकृष्ण को मारने की फिर योजना बनाई
।मल्लयुद्ध करने की प्रतियोगिता का आयोजन किया और श्रीकृष्ण-बलराम को भी
बडे आदर पूर्वक आमंत्रित किया । श्रीकृष्ण-बलराम अक्रूर जी के साथ मल्ल
युद्ध देखने गए भी थे। कहानी आपको पता भी होगी कि कंस ने पहले तो दोनों
को कुवलयापीड हाथी के पैरों से कुचलवाने का प्रयत्न किया ,हाथी उन्हें
नहीं मार पाया तो चाणूर –मुष्टिकनाम के दो योद्धाओं से इनका मल्लयुद्ध
करवाकर मारने की कोशिश की । परिणाम विपरीत निकला ।चाणूर मुष्टिक मारे गए
।अंत में श्रीकृष्ण ने अत्याचारी मामा कंस को भी मार कर ब्रजवासियों का
उद्धार किया ।किन्तु कृष्ण को सराहना फिर भी नहीं मिली ।कंस की मृत्यु के
बाद उसकी पत्नियां जो जरासंध की बेटियां थीं,विधवा हो गईं तो मगध का राजा
यह कैसे सहन सकता था ।वह बार बार मथुरा पर आक्रमण करने लगा ।स्वाभाविक है
इस आक्रमण से राजा और प्रजा सभी तंग थे ।अत गणराज्य के सभी सदस्यों ने
मिल कर सभा बुलाई ।सभा में राजा शूरसेन भी थे।उन्होंने सर्व सम्मति से
कहा कि जरासंध श्रीकृष्ण से बदला लेना चाहता है अत उनकी वजह सेवह बार-बार
मथुरा पर आक्रमण कर रहा है ।हमारा मत है,कि अगर कृष्ण मथुरा छोड कर कहीं
और चले जाएं तो हम पर भी जरासंध आक्रमण नहीं करेगा ।सभा में श्री कृष्ण
उपस्थित थे ।उन्होंने नाना शूरसेन को प्रणाम करके सभा को संबोधित कियाऔर
कहा कि यदि सभी सदस्यों का यही मत है तो मैं तुरंत मथुरा को छोडने को
तैयार हूं ताकि मेरी मातृभूमि और मथुरावासी सदा के लिए सुरक्षित हो जाएं
,।यहां से मैं पश्चिम कीओर प्रस्थान करूंगा और जरासंध कीसेना के सामने से
होकर जाऊंगा ताकि वे मेरे पीछे आजाएं और मथुरा नगरी को छोड दें
।श्रीकृष्ण सदा के लिए मथुरा से दूर चले गए और पश्चिम में द्वारका नगरी
बसाई ।

आज भी कुछ कुछ वैसा सा ही हो रहा है ।गुजरात में जन्में भारत के
प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी भी कुछ करना चाहते हैं तो विपक्ष के
लोग उसमें गलतियां ढूंढने लगते हैं ।आजकल भी ऐसा ही हो रहा है ।
नरेंन्द्र मोदी जी ने पाकिस्तान में छपे 500,और 1000, रु के नोटों को बंद
करने के लिए और कालाबाजारी को रोकने के लिए पुराने 500 और 1000,रुपए के
नोटों को बंद करने की बात कही तो सब तरफ शोर मच रहा है विपक्ष इस नियम
को वापस लेने की मांग कर रहा है सामान्य जनता को होने वाली अ सुविधाओं
की दुहाई दे रहा है। उसे यह नहीं समझ आरहा कि ऐसा करने से जाली नोटों का
चलन बंद होरहा है साथ ही काश्मीर में होने वाली पत्थर बाजी भी कम हो रही
है।उन्हें तो बस अपना स्वार्थ ही दिखाई देरहा है कि उनका जमा किया कालाधन
कहीं व्यर्थ ना चला जाए ।

सामान्य जनता हर तरह से कष्ट सहने के लिए तैयार है दुकानदारों ने
स्कूटरवालों ने पी. टी. एम. की सुविधा देना आरंभ कर दिया है ।वे हर तरह
से अपनी सरकार के साथ हैं ,परंन्तु विपक्ष के नेता चाहते हैं कि सरकार
तीन दिन के अंदर यह नियम वापस ले ।विपक्ष का स्वार्थ देश को आगे बढने
देगा या उसे पीछे लेजाएगा ,यह तो आने वाला समय ही बताएगा ।

---------------------------------------------------------------------------------------------सुधा
सावंत, एम ए, बी.एड
Click here to Reply or Forward