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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

वेद-मंगल भवन अमंगलहारी


*वेद परमानंद प्राप्ति का अमोघ शस्त्र भी शास्त्र भी*
आज का भगवद चिन्तन
3-3-2018
*मंगल भवन अमंगलहारी*
अक्सर सुनने मिल ही जाता है जहां रामायण की विशेषकर कथा हो रही हो। आज सुबह ही कानों में ये शब्द पड़े।
वस्तुतः
अमंगल को हरने वाले, मंगल करने वाले भवन वही होते हैं जिनमें चहुँ ऒर से प्रीतियुक्त मधुर सम्बन्धों की महक उठे।
मधुर सम्बन्ध तभी बनते हैं जब वैदिक संस्कृति युक्त घर निर्मित व घर के सभी सदस्य प्रीति पूर्वक वेद आधारित त्यागमय जीवन जीते हों। रामायण के भीतर आये समस्त अयोध्यावासियों में पात्र विशेष यथा माता कौशल्या राजा दशरथ रानी सुमित्रा, वीरमाता कैकेयी- पुत्र भरत -भ्राता श्रीराम, लक्ष्मण पत्नी- उर्मिला -बहिन जानकी इत्यादि का त्याग तपश्चर्या से पूरित सबसे मधुर सम्बन्ध था।।
इसलिए तो कहा गया
दैहिक दैविक भौतिक तापा।
राम राज्य काहू नहीं व्यापा।।
अतः मंगल भवन बनाना चाहते हो तो
वेदानुकूल कर सुविचार
वेदानुसार बोलो वचन।
वेदानुकूल व्यवहार मधुर यदि,
अमंगल खुद ब् खुद शमन ।।

जो होली सो

जो होली सो होली भुला दो उसे
आज मिलने मिलाने का त्यौहार है-2
जो होली सो होली भुला दो उसे -2
आज मिलने मिलाने का त्यौहार है-2
छोड़ दो छल कपट द्वेष की भावना -2
वेद गंगा बहाने का त्योहार है-2
जो होली सो होली भुला दो उसे -2
आज मिलने मिलाने का त्यौहार है-2
ना कीचड़ उछालो ना गाली कहो -2
यह युद्ध बन्द करने में आनन्द है-2
स्वर्ग सम शुद्ध वातावरण हो यहां -2
आज होली मनाने का त्योहार है-2
जो होली सो होली भुला दो उसे -2
आज मिलने मिलाने का त्यौहार है-2
यह तो हीरे से बढ़कर है इस का पतन-2 व्यर्थ में ना गवाना जरा ध्यान दो-2
बांट दो ज्ञान गीता का श्रीकृष्ण सम -2
प्रेम बंसी बजाने का त्योहार है-2
जो होली सो होली भुला दो उसे -2
आज मिलने मिलाने का त्यौहार है-2
लोग श्रद्धा से जिसका करें अनुकरण-2
ऐसा आदर्श जीवन बनाओ सभी-2
पाप अन्याय उत्पात बढ़ने न दे-2
विघ्न संकट मिटाने का त्योहार है-2
जो होली सो होली भुला दो उसे -2
आज मिलने मिलाने का त्यौहार है-2
कर रहे जो अनाचार पीकर यहां-2
यह अहंकार मदिरा भरी प्यालियां-2
ये सफल होगी होली सभी बंधुओं-2
वेद अमृत पिलाने का त्योहार है-2
जो होली सो होली भुला दो उसे -2
आज मिलने मिलाने का त्यौहार है-2
यह विरह यह मिलन काव्य श्रृंगार रस-2
गीत भद्दे गगन में सुनाई ना दे-2
डाल दे जोकि मुर्दों मे भी जान जो -2
गीत ऐसे सुनाने का त्योहार है-2
जो होली सो होली भुला दो उसे -2
आज मिलने मिलाने का त्यौहार है-2
सभी मनुष्य में हो प्रेम वातावरण-2
हैं सभी भाई भाई ना झूठा कथन-2
राघव हों संगठित करें ह्रदय का मिलन-2
जीवन ज्योति जलाने का त्योहार है-2
जो होली सो होली भुला दो उसे-2
आज मिलने मिलाने का त्यौहार है-2
छोड़ दो छल कपट द्वेष की भावना -2
वेद गंगा बहाने का त्योहार है-2
जो होली सो होली भुला दो उसे -2
आज मिलने मिलाने का त्यौहार है-2
प्रेम गंगा बहाने का त्योहार है आज मिलने मिलाने का त्यौहार है-4

सत्यार्थ

सत्यार्थ प्रकाश का पढ़ना, यदि जन जन में प्यारा हे जाये |
पढ़कर के सभी अमल करें, वैदिक उजियारा हो जाये ||
फुले फुलवाड़ी वेदों की, जग से अंधियारा मिट जाए |
सत्य धर्म पर अमल करें, स्वर्ग सारा जग बन जाए ||

आर्य राजेन्द्र
संगरूर (पंजाब)

जनवरी नया

जनवरी नया वर्ष नहीं है वो हुडदंग और यीशु खतना दिवस है अत: उसे भुलाना ही समझदारी है |

कल्याण

कल्याण -कामना

सब वेद पढ़ें , सुविचार बढ़े , बल पाय चढ़ें नित ऊपर को ।
अविरुद्ध रहें , ऋजु पंथ गहें , परिवार कहें वसुधा भर को ।।
ध्रुव धर्म धरें , पर दुःख हरें , तन त्याग तरें , भव सागर को ।
दिन फेर पिता , वर दे सविता , हम आर्य करें वसुधा भर को ।

आर्य राजेन्द्र
संगरूर

जीवन के

जीवन के उद्धार के लिए सत्यार्थ प्रकाश पढ़ें

सारबचन

सारबचन पुस्तक (राधा स्वामी) में योगेश्वर श्री कृष्ण को लबार गुण्डा लिखा है |

जन्मदिन

जन्मदिन आयुष्य यज्ञ:

विशेष वैदिक यज्ञ आयष्य वेद मन्त्र:
आयु अनुसार गायत्र मन्त्राहुति व तिहरे धागे की गांठ लगाना (स्मरणार्थ)
अंग्रेजी तारीख से नहीं अपितु तिथिनुसार मनाना जैसे राम कृष्ण, महर्षि दयानन्द, गुरूनानक आदि के.
केक काटना हिंसक प्रवृति पैदा कर पाप है , बच्चे चाकूबाजी सीखकर रियान व अन्य कान्वैंट स्कूल की घटनाएं होती हैं
यज्ञोपरान्त आशीर्वाद, बधाई गीत भजन..
Happy birthday की बजाय शुभ जन्मदिन अभिनन्दनम् सभी से बुलवाना
पुष्प वर्षा , शान्ति पाठ, जय घोष व सब को मिष्टान्न

सार बचन

सार बचन राधास्वामी (छन्द-बनंद)-हुजूर स्वामी जी महाराज पुस्तक में कई बातें गलत लिखी हैं:-
वेद निन्दा पृ. ३३७, २०४
राम कृष्ण निन्दा- ७२,१३,१९०-१९१
स्त्री निन्दा-१०६,१०७
ईश्वर विमुखता (नास्तिकता)-७२
विद्या विरोध-२१७
राधास्वामी हिन्दु नहीं-१७८
परमात्मा को पैदा करने वाले संत-१७८
पांच शब्द- ज्योति निरंजन, ओंकार, रोरंकार, सोहं, सतनाम (कनफुकवे शब्द)

ओ३म् बाला

ओ३म् बाला देकमणीयस्कमुतैकं नेव दृश्यते |
तत: परिष्वजीयसी देवता सा मम प्रिया ||
(अथर्ववेद काण्ड १० सूक्त ८ मंत्र २५)

आत्म देह में सूक्षम ऐसी | नहीं दीखती वह है कैसी ||
उससे भी जो सूक्ष्म महा है | ईश उसी से चिपट रहा है | वही देवता मेरे प्यारे | पर परमेश्वर हैं साथ हमारे ||

आर्य राजेन्द्र
संगरूर

आर्यत्व

आर्यत्व रंग भरा मेरी पिचकारी में
आर्यत्व रंग से रंग दो सब को दुनिया सारी मे

कृण्वन्तोविश्वमार्यम्

वैदिक

वैदिक साहित्य में यज्ञ शब्द अनेक अर्थों में प्रयोग होता है । इसका एक मुख्य अर्थ है, शुभ कर्म करना।
तो संसार में जितने भी शुभ कर्म हैं , वे सब यज्ञ कहलाते हैं । जैसे हवन करना, दान देना , सेवा करना, परोपकार करना, वेद प्रचार करना इत्यादि।

जो लोग इन शुभ कर्मों को छोड़ देते हैं , ईश्वर भी उन्हें दुख भोगने के लिए छोड़ देता है ।
जो लोग इन शुभ कर्मों को करते रहते हैं , ईश्वर भी उन्हें सुख देता रहता है।
तो शुभ कर्मों को न छोड़ें, अपना यह जन्म और अगला जन्म सुखमय बनाएं।

जो व्यक्ति

जो व्यक्ति सन्ध्या हवन नहीं करता वह देवऋण से मुक्त नहीं होता |

गाज़ी का

गाज़ी का अर्थ है गज़वा करने वाला अर्थात किसी बड़े समूह या जाति को अपनी ताकत से मुसलमान बनाने वाला या भारी संख्या में काफिरों को मारने वाला।

[६:३०

[६:३० अपराह्न २८-२-२०१८] Rajendra Arya आर्य: गाजीपुर बहुत नगर हैं
[६:३० अपराह्न २८-२-२०१८] Rajendra Arya आर्य: जीरकपुर-ढकोली-गाजीपुर

जी धन्यवाद

जी धन्यवाद सही जानकारी दी, कुरान में लिखा है जो पैगम्बर मोहम्मद पर ईमान नहीं लाता वो काफिर है उसे मारने वाला गाजी कहलाता है

☘आज का

☘आज का सुविचार☘