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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

सुरीले गीत

साम- श्रद्धा : सुरीले गीत (पं. देवनारायण भारद्वाज रचित)
Submitted by Rajendra P.Arya on Sat, 2011-10-29 09:00. साम वन्दना
ओ३म् गायन्ति त्वा गायत्रिणो$र्चन्त्यर्कमकिर्ण: ।
ब्रहम्णास्त्वा शतक्रत उद्वंशमिव ये मिरे ।। साम ३४२ ।।

यदि तुमको ऊँचा उठना है ।
प्रभु का गुण गायन करना है ।।

आओ गीत सुरीले गायें ।
गीत सभी के मन को भायें ।
हो प्राण त्राण प्रभु गायन से,
श्रुति छन्द गायत्री जपना है ।।

कल्याण गीत में गरिमा है ।
बस रही मन्त्र में महिमा है ।
शत शत कृतियाँ हैं जहाँ व्यक्त,
अनुपालन उनका करना है ।।

मन्त्रों की यही अर्चना है ।
जग में हो उठती रचना है ।
आओ कुछ कर्त्तव्य निभायें,
हर कर्म यज्ञवत करना है ।।

राजेन्द्र आर्य
संगरूर
चलभाष : 09041342483