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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

एक नास्तिक जादूगर

काशीं में प्रसिद्ध्‌ हुआ कि एक वेद शास्त्र का ज्ञाता बड़ा नास्तिक आया है जिसके दोनो ओर दिन में मशालें जलती हैं | जो भी पण्डित उससे शास्त्रार्थ करने जाता है उसके तेज से दब जाता है | मुझे अच्छी प्रकार याद है कि माताजी उन दिनों हमें बाहर नहीं जाने देती थी इस भय से कि कहीं हम दोनो भाई जादूगर के फन्दे में न फंस जांय | पिताजी ने पीछे बतलाया था कि वह प्रसिद्धि अवधूत दयानन्द की थी | माताजी को क्या मालुम था कि उनके देहान्त के पीछे उनका प्यारा बच्चा उसी जादुगर के उपदेश‌ से प्रभावित होकर उनका अनुयायी बन जायगा |

स्वामी श्रद्धानन्द
(कल्याण मार्ग का पथिक‌)