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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

अब जूतों की बारी

मुँह से बातें चलती थीं, अब जूते चला करेंगे
जूतों पर तुम खर्च न करना, जूते मुफ्त मिलेंगे

जूतों की है बात चली तो, सैण्डल कैसे पीछे
सम्भ‌ल के रहना अब बहनों से, सैण्डल मुफ्त मिलेंगे

जूते जो पैरों की शोभा, मस्तक पर पड़ेंगे
तो बड़े बड़े नेताओं के, मुखड़े खूब सजेंगे

भूल जाएँगे अहंकार सब, धरती पर लौटेंगे
या खिसियानी बिल्ली बनकर, वे खम्बों को नोचेंगे

वाह रे भाई! इज्जत करने की, कैसी राह निकाली
फूलों की अब बात न करना, जूतों की अब बारी

सभा और पण्डालों में, अब जूते चला करेंगे
लेकर थैला साथ तुम चलना, जूते मुफ्त मिलेंगे