राम और कृष्ण बन के जग को बचा लो !

जय राम राम !राम राम ! राम तुम कहो
अब राम बन के रावण से युद्ध भी करो

जय कृष्ण कृष्ण ! कृष्ण कृष्ण‌ ! कृष्ण तुम कहो
अब कृष्ण बनके क‍ंस, जरासंध का वध करो

अब राम का धनुष उठा लो अपने हाथ में
रावण के दश शिरों को मिला दो तुम खाक में

बन कृष्ण सुदर्शन, तुम चक्र चला दो
अर्जुन को फिर से गीता का, तुम पाठ पढ़ा दो

मर्यादा में चलो, और जग को चला दो
पर पहले अपने देश को, यह पाठ पढ़ा दो

मर्यादा पुरुषोत्तम ! थे, श्री राम हमारे
हम उनके हैं वंशज, तो क्यों मर्यादा विसारे

गर कृष्ण‌ बनना चाहो, तो योगी खुद बनो
योगीराज कृष्ण ! की, जय-जयकार फिर करो

वह ब्रह्मतेज ज्ञानी थे, वह दिव्य पुरुष थे
पुरुषोत्तम‌ ! युगपुरुष ! भगवान ही तो थे

फिर क्यों बने हम हारे हुए, जो भाग्य भरोंसे
क्यों दीन हीन, दुर्बल, जो शत्रु से हारे

अब कृष्ण की बजाई बांसुरी को सुना दो
माता सीता की सन्ध्या को, हृदय में दोहरा लो

राम-राज्य लाना चाहो तो रावण को जला दो
और कृष्ण बनना चाहो, तो गीता को सुना दो

वेद-पाठ पढ़के ही सब, दिव्य हैं बनते
तो वेद-पाठ, वेद-ज्ञान, यज्ञ रचा लो

न एक भी हो दीन-हीन अपने देश में
छूत-छात, जात-पात, जड़ से मिटा दो

भगवान के तुम भक्त बनो, दया-दीन पर करो
कोई निर्बल, न निर्धन हो, प्रयत्न तुम करो

खुद बनो तपस्वी, तप जग को सिखा दो
फिर राम और कृष्ण बन, इस जग को बचा लो ||