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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

चुनिए जनाब‌

एक तरफ सारी आराम की वस्तुएं पर मित्र एक भी नहीं, न कोई मानव, न पक्षी, न जानवर !

दूसरी और केवल एक ही सच्चा मित्र, फिर बाकी कुछ हो न हो !

क्या लेना चाहोगे ?

शायद या यकीन से कहें, तो सबसे पहले मित्र , कम से कम एक, उसके बाद जो मिल जाए !

तो फिर यदि ऐसा मित्र मिल जाए, जो सारे जग से तुम्हारी मित्रता करवा दे !

कैसा रहेगा ?

परमात्मा ऐसा ही मित्र है, बस उसे सही सही जानना होगा ||

ON

ON SWAVIVEKANAND
9870807070

जीवन के अन्तिम समय में हम अपने शत्रुओं की आवाज नहीं सुनेंगे
बल्कि अपने मित्रों का मौन | कुछ समय प्रतिदिन मौन रह कर
आत्मिक उन्नति करें |

राजेन्द्र आर्य‌