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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

इस वैलेनटाइन वैल इन टाइम ? (IS VALENTINE WELL IN TIME ?)

वैलेनटाइन इस वैल इन टाइम
यदि ये लाए संग में शादी का प्रस्ताव
वरना ये सब कोरी बातें,होगा यह सब कोरा प्यार

सार्वजनिक स्थल उन्हीं रिवाजों के लिए मान्य हैं
जिन्हें सभी जन अपनाते हैं, वरना तो सब निजी अफेयर
अपनी चारदिवारी में ही अच्छे लगते हैं

गर, वैलेनटाइन भारत की सभी जनता को मान्य नहीं है
तो कैसे आजादी के नाम पर ,इसको हम आजादी दे दें
सार्वजनिक स्थल या फिर बाग बगीचों में
जहाँ सर्वजन जन समूंह बन कर उमढ़ें हैं
बालक बच्चे जवाँ और बूढ़े, जो इन सब का है
कैसे उसको हम, इन सब से छीनें

क्या सुरापान, भाँग, जुए को ऐसी आजादी हम देते
यह तो क्या, हम धर्म रिवाजों को भी
सार्वजनिक स्थल पर, करने की नहीं इजाजत देते
पूजा पाठ, नमाज, अरदास या यज्ञ हवन
क्या सड़कों पर हम, जहाँ कहीं करते हैं
यदि नहीं तो, वैलेनटाइन को सार्वजनिक करने की
उतावली में हरदम, हम क्यों रहते हैं

क्या जबरदस्ती है यह, या गुमराह करने की इक चाल
ऐसा है यदि तो क्यों न जन जन, करे सदा इसका प्रतिकार
पर जैसे वैलेनटाइन सार्वजनिक नहीं है
वैसे ही मारपीट भी, सार्वजनिक अधिकार नहीं है
तो, आएं बाज दोनो ही पक्ष, अनैतिक हरकत से अपनी
और करें न सरकारें व मीडिया, इसका व्यर्थ‌ प्रचार

भारत है यह, इसको भारत ही रहने दो !
इन्डिया तो कह लिया पेट भर, अब लुटिया न और डुबो दो ||

AUM...अति

AUM...अति उत्तम