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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

महर्षि दयानन्द - पूर्ण पुरुष की मनोकामना

पूर्ण पुरुष महर्षि दयानन्द जी के जन्मोत्सव पर सकल आर्य जगत आज गौर्वान्वित अनुभव कर रहा है | आइए इस अवसर पर याद करें कि वह महामानव‌ क्या चाहते थे ‍:-

पूर्ण पुरुष की मनोकामना थी कि यह जननी भारत भूमि सचमुच स्वर्ग भूमि बन जावे और अपना खोया हुआ गौरव प्राप्त कर फिर से जगत गुरु की पदवी पर विराजमान हो जावे और इसके प्रधान लाल किला के मंच पर खड़े होकर संसार भर को यह संदेश दे सकें जैसा कैकय देश के राजा ने (जिसकी कथा छान्दोग्य उपनिषद् के प्रपाठक 7वा‍ खण्ड 12 में है) पूरे अभिमान के साथ कहा था |

न मे स्तेनो जनपदे न कदर्यो न मद्यपः |
नाना हिताग्नि न अविद्वान न स्वैरी स्वैरनी कुतः ||

अर्थात न मेरे देश में कोई चोर है, न कोई कृपण, न शराबी, न कोई अग्निहोत्र रहित‌, न कोई व्याभिचारी पुरुष तब स्त्री व्यभिचारिणी कैसे हो सकती है |

अपनी इस मनोकामना को सिद्ध करने के लिए महर्षि ने दिन रात परिश्रम किया | लाठियां, गालियां, ईंट पत्थर, जहर खाये, अपमान सहे, गर्मीं-सर्दी, भूख-प्यास, दुख, रंज-गम सब सहन किये, और इसको पूरा करने के लिए निम्नलिखित सिद्धान्त निश्चित किये |

1. विदेशी राज्य कितना भी अच्छा क्यों न हो स्वराज्य का मुकाबला नहीं कर सकता |
2. देश को संगठित करने के लिए एक भाषा का होना आवश्यक है और वह हिन्दी भाषा ही हो सकती है |
3. देश में से छूत-छात, ऊँच-नींच, रंग नसल का भेद भाव मिटाये बिना देश संगठित नहीं हो सकता |
4. छोटी आयु का विवाह, अनमेल विवाह, देश के लिए घातक प्रथाएं हैं, इन को हटाना होगा |
5. एक समय में एक ही स्त्री से युवा अवस्था में विवाह की प्रथा प्रचलित करनी होगी |
6. देश में पंचायती राज्य स्थापित करना होगा |
7. विद्या की वृद्धि और अविद्या का नाश करना होगा | सबको विद्या का अधिकार समान देना होगा |
8. देश देशान्तर और द्वीप द्वीपान्तर में जाने का जो जो प्रतिबन्ध है उसको ह‌टाना होगा |
9. देश में कल कारखाने खोलने से देश उन्नत होगा |
10. मातृभूमि, मातृ सभ्यता और मातृभाषा से प्यार करना होगा |
11. गो, विधवाओ‍ और अनाथों का संरक्षण करना होगा |

इन सिद्धान्तों के प्रचार के लिए पहले तो महाराज ने पाठशालाएँ स्थापित करनी आरम्भ कीं | अतः फर्रूखाबाद, छलेसर, कांशी आदि कईं स्थानों पर पाठशालाएं स्थापित कीं, परन्तु जब उनसे अपना मनोरथ सिद्ध होते न देखा तो यह पाठशालाएं बन्द कर दीं, इसके बाद महर्षि ने अपनी मनोकामना पूर्ण करने के निमित्त आर्य समाज रूपी ट्रेनिंग कालेज बनाने का प्रयत्न आरम्भ कर दिया और साथ साथ ट्रेनिंग कोर्स तथा सत्यार्थ प्रकाशादि ग्रंथ रचना भी आरम्भ कर दी | जिसने एकदम इस देश में जागृति की एक लहर पैदा कर दी |

(पूर्ण पुरुष का विचित्र जीवन चरित्र से साभार उदृत)