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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

जग उठा है देवता का बल हमारा

आर्यवीर श्री अग्नीवीर जी के साहसपूर्ण नेतृत्व‌ को प्रेषित‌ - श्री मधुर शास्त्री जी की ओजपूर्ण कविता के अंश :-

"जग उठा है देवता का बल हमारा

अब किसी शैतान से डरना नहीं है

वे हमीं हैं शून्य रेखा में

सदा नवरंग भरते

जन्म लेते तारकों को

एक हम ही सूर्य करते

हम नहीं इतिहास का

हर वाक्य कहता है कहानी

हम जहाँ रखते कदम

वहाँ गाथा लिखती है जवानी

सत्य की पतवार अपने हाथ में जब

फिर किसी तूफान से डरना नहीं है

जग उठा है देवता का बल हमारा

अब किसी शैतान से डरना नहीं है ||"