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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

'धर्म प्रचार' - पण्डित लेखराम जी आर्य पथिक कृत 'कुलियात आर्य मुसाफिर 'से (2)

लाखों सूरमा वीर हृदय वाले महात्मा जान पर खेल कर धर्म पर बलि दे गये | सीस दिये किन्तु धर्म नहीं छोड़ा | उदाहरणार्थ देखो शहीदगंज और टाड राजस्थान |

आप जानते हैं जब मुसलमान नहीं आए थे | तो उनकी जियारतें, कबरें, मकबरे, खानकाहें और गोरिस्तान भी इस देश में न थे जब 8-9 सौ वर्ष से मुसलमान आए तब से ही भारत में कबरपरस्ती शुरू हुई | जो अत्याचारी मुसलमान हिन्दु वीरों के हाथ से मारे गए | मुसलमानों ने उनको शहीद बना दिया और हिन्दुओं को जहन्नमि (नारकी) शोक शत सहस्त्र शोक |

हमारे पिता पितामहों की रक्तवाहिनी असिधारा ने जिन अत्याचारियों का वध किया, हमारे पूर्वजों के हाथों से जो लोग मर कर दोजख (नरकाग्नि) में पहुँचाए गए | हम अयोग्य सन्तान और कपूत पुत्र उन्हें शहीद समझ कर उन पर धूपदीप जलाते हैं | इस मूर्खता पर शोकातिशोक ! इस अपमान की कोई सीमा नहीं रही | हे परमेश्वर ! यह दुर्गति कब तक रहेगी ?

ऐ हिन्दु भाइयो ! सारे भारत में जहां पक्के और उँचे कबरिस्तान देखते हो, वह लोग तुम्हारे ही पूर्वजों के हाथों से वध किये गये थे | उनके पूजने से तुम्हारी भलाई कभी और किसी प्रकार सम्भव नहीं | प्रथ‌म अच्छी प्रकार सोच लो |

अगर पीरे मुर्दा बकारे आमदे |
जि शाहीन मुर्दा शिकार आमदे ||

यदि मरा हुआ पीर काम आ सकता तो मृत बाज भी शिकार कर सकते | मुसलमानों ने मन्दिर तोड़े, बुत तोड़े | लाखों का वध किया | इस कठोर आघात के कारण लोग मुसलमान हुए | देखो तैमूर का रोजनामचा (डायरी) |

परन्तु भारत ऐसा दुर्भाग्यशाली न था कि ईरान, रोम, मिश्र और अरब की भाँति कभी न जागता | बीच 2 में जगाने वाले उसे जगाते रहे |

मुसलमानों के अत्याचार से ही सती प्रथा प्रचलित हुई ताकि ऐसा न हो कि वे निर्दयी देवियों को पकड़ कर खराब करें | रानी पद्मनी का सती होना और अलाउद्दीन का अत्याचार | इस घटना से सम्बन्धित इतिहास ध्यान से पढ़ो |

पहला प्रायश्चित - सबसे प्रथम आर्यावर्त में शंकराचार्य जी ने 25 करोड़ बौद्धों का प्रायश्चित करा उनको वैदिक धर्म में प्रविष्ट कराया |

दूसरा प्रायश्चित - महाराजा चन्द्रगुप्त ने किया अर्थात सल्यूकस-बावल के अधिपति (युनान के राजा) की पुत्री से विवाह किया जिसको आज दो सहस्त्र एक सौ वर्ष हुए |

तीसरा प्रायश्चित - राना उदयपुर ने किया जिसने ईरान के राजा नौशेरवां पारसी की कन्या से, जो कि कुस्तुन्तुनिया के राजा सारस की दोहती (दुहित्री) थी, उस से विवाह किया जिसे 13 सौ वर्ष हुए हैं |

चौथा प्रायश्चित - लाहौर के पण्डितों ने राजा सुखपाल का कराया जिसको आठ सौ वर्ष हुए हैं |

पाँचवां प्रायश्चित - मरदाना मुसलमान का बाबा नानक जी ने कराया जिस को चार पाँच सौ वर्ष हुए और उस के शव को खुर्जा में अग्नि में जलाया |

छठा प्रायश्चित - पण्डित बीरबल और राजा टोडरमल ने अकबर बादशाह का कराया, और उसका नाम महाबलि रखा | गायत्री सिखाई, पढ़ाई, यज्ञोपवीत पहनाया और हिन्दु बनाया | गोवध निषेध और मांसाहार से घृणा हो गई | उसने दाड़ी के साथ इसलाम को सलाम कर दिया | [फुट नोट् : वर्तमान इतिहासकारों ने अकबर का हिन्दु होना कहीं नहीं माना - अनुवादक|]आज्ञा दी कि जो हिन्दू भूल से, अज्ञान से, प्रेमपाश में बन्ध कर अथवा लोभ से मुसलमान हो गया हो | यदि वह अपने हिन्दु धर्म में आना चाहता हो तो वह स्वतन्त्र है | उसे मत रोको | यदि कोई हिन्दु स्त्री किसी मुसलमान के फन्दे में मुसलमान होना चाहे तो उसे कदापि मुसलमानी न बनने दिया जाए | प्रत्युत सम्बन्धियों को सौंपी जाए | विस्तार से देखो | (दबिस्ताने मजाहिब पृ.334, 338 शिक्षादश नवल किशोर)

सातवाँ प्रायश्चित - गुरु गोविन्द सिंह जी ने कराया | अत्याचारी औरंगजेब के समय में उन्होंने समस्त मजहबियों को सिंह बना कर वैदिक धर्म में सम्मिलित किया | इस के अतिरिक्त उन के दो सिख एक बार मुसलमानों नें पकड़ कर बलात् मुसलमान कर दिये थे | जब समय पाकर वह उन के पास आए तो उन को पुनः हिन्दु बना लिया | सिंह बनाया और धर्म में मिलाया |

आठवाँ प्रायश्चित - प्रतापमल ज्ञानी ने कराया | यह कार्य भी औरंगजेब बादशाह के समय में हुआ | जबकि एक हिन्दु लड़का मुसलमान हो गया था | उस को शुद्ध कर के वैदिक धर्म में मिलाया |(देखो दबिस्तान मजाहिब शिक्षा 10 पृ.239 सन् 1296 हिजरी नवल किशोर)

नवाँ प्रायश्चित - महाराजा रणजीत सिंह ने कराया | अपने और अपने कई सरदारों के लिए मुसलमानों की लड़कियां लीं और उनको हिन्दु बनाया |

दसवाँ प्रायश्चित - महाराजा रणवीर सिंह जम्मू कश्मीर ने किया जब कि तीन राजपूत सिपाही लद्दाख में मुसलमान हो गए थे | बड़ी प्रसन्नता पूर्वक तीनों को पुनः हिन्दु धर्म में सम्मिलित किया | जम्मू के विद्वान पण्डितों ने रणवीर प्रकाश एक ग्रन्थ बनाया, जिस की दृष्टि से चालीस पचास वर्ष से मुसलमान हुए लोगों को हिन्दुधर्म में सम्मिलित किया जा सकता है | काशी के पण्डितों ने भी इस से सहमति प्रकट की और व्यवस्था दी | एक बहुत बड़ी पुस्तक प्रत्येक सभा को जम्मु से बिना मूल्य मिल सकती है |

ग्यारहवाँ प्रायश्चित - श्रीमान् स्वामी दयानन्द जी महाराज ने कराया | अर्थात काजी मुहम्मद उमर साहिब सहारनपुर निवासी को मुसलमान से आर्य बनाया और वैदिक धर्म पर चलाया | वह अब देहरादून में ठेकेदार है | जिनका नाम अलखधारी है, और वह देहरादून समाज के सदस्य हैं |

बारहवाँ प्रायश्चित - स्वामी जी के परलोक गमन के पश्चात श्रीमती परोपकारिणी सभा ने कराया | अर्थात श्री अबदुल अजीज सहिब को जो पंजाब यूनिवर्सिटी की मौलवी कालिज की डिग्री प्राप्त कर चुके हैं और जो अब गुरदासपुर (पंजाब) में असिस्टैंट कमिश्नर हैं [फुट नोट -‍ यह घटना आर्य पथिक की अपने काल की है - अनुवादक] | शुद्ध किया और आर्य बनाया जिन का शुभ नाम अब राय बहादुर हरदस राम जी है |

तेरहवाँ प्रायश्चित - सन्त ज्वाला सिंह जी ने कराया जिन्होंने न्यूनातिन्यून चालीस मुसलमानों को वैदिक धर्म में लाकर शुद्ध किया |

चौदहवाँ प्रायश्चित - 14 वर्ष हुए श्री रामजी दास ईसाई ने सात लड़कों को ईसाई बनाया था | कसूर के पण्डितों और महात्मा लोगों ने उनको शुद्ध किया | अब वे लड़के अच्छे 2 पदों पर हैं |

पन्द्रहवाँ प्रायश्चित - आर्य समाज के सदस्यों ने किया | अर्थात राजपुताना, पंजाब, पश्चिमोत्तर सीमा प्रान्तादि में न्यूनातिन्यून दो सहस्त्र मुसलमानों, ईसाईयों और जैनियों को शुद्ध करके वैदिक धर्म में लाकर आर्य बनाया | सन्ध्या, गायत्री सिखा कर प्रायश्चित्त कराया | गौ ब्राह्मण का हितैषी बनाया | अन्धकार से निकलवाया | क्योंकि यह संख्या प्रतिदिन उन्नति पर है | अतः ठीक संख्या बताना कठिन है |

प्रिय भाईयो ! इस विनम्र प्रार्थना को पढ़ कर पांच मिनिट तक हृदय में विचार करो कि यदि आप इसी प्रकार बेसुध रहे तो आप की क्या अवस्था होगी |

आठ सौ वर्ष के अन्दर आप 24 करोड़् से न्यून होते होते 20 करोड़ रह गए | आप गणित विद्या जानते हैं | अरब अ मुतनासिब को कार्य में लाएं :-
प्रश्न
चार करोड़ हिन्दु आठ सौ वर्षों में मुसलमान हो गए तो 20 करोड़ कितने वर्षों में होंगे ?
उत्तर
800 वर्ष * 20 करोड़्/ 4 करोड़ = उत्तर 4000 वर्ष में | भाइयो ! अवश्य सम्भलो | आँखें खोल कर देख लो | कुम्भकरण की निद्रा मत सोवो | धर्म नष्ट हो रहा है |

लोग वेद के धर्म को नष्ट कर रहे हैं | लोभ, लालच, धोखे में फंसा कर तुम्हारे बच्चों को म्लेच्छ बना रहे हैं | यदि आप इसी प्रकार सोते रहे | करवट न बदली तो 4000 वर्ष के पश्चात एक भी वैदिक धर्म का अनुयायी न रहेगा | सब म्लेच्छ हो जाएंगे | केवल यही एक नदी आप के धार्मिक भवन को गिराने वाली नहीं है | एक और नद भी अभी जारी हुआ है | उसका नाम ईसाई धर्म है |

दो सौ वर्ष का समय हुआ कि ईसाई पादरियों ने यहां आकर इंजील सुनानी शुरू की | उस समय इस देश में एक भी इसाई न था | तुम्हारे बहुत से अकाल पीड़ित लोगों को मद्रास और अन्य भिन्न भागों में इन पादरियों ने लोभ देकर ईसाई बना लिया | सामायिक जन गणना से ज्ञात हुआ कि इस समय इसाई बीस लाख हैं |

क्या कभी आपने सोचा कि इस समय तक कितने ईसाई हो चुके हैं ? भाईयो ! परमेश्वर के लिये आँखें खोलो | नींद से जागो | मुख प्रक्षालन करके स्नान करो | अपनी अवस्था सम्भालो | तुम्हारे धर्मरूपी पेड़ को दोनो ओर से दीमक लग रही है | अपने आप को बचा लो | अन्यथा तुम्हारा ठिकाना न मिलेगा | चिह्न तक न रहेगा |

मद्रास आज कल सौभाग्यशाली है | जहां सैंकड़ों घरों ने, जो अकाल के कारण ईसाई हो गये थे, ईसाई धर्म छोड़ दिया है | ब्राह्मणों ने उन सहस्त्र व्यक्तियों को वैदिक धर्म में मिला लिया है | ईसाई रो रहे हैं | कुछ बस नहीं चलता | तुम्हें भी चाहिए | दया करो | कृपा करो | अपने भोले भाले बेसमझ बच्चों का जीवन व्यर्थ न गंवाओ | जो शरण आये उसे ठीक करलो | प्रायश्चित करा के शास्त्रोक्त रीति से शंकर स्वामी की भाँति, बाबा नानक की भाँति, चाणक्य ऋषि की भाँति, महाराजा रणवीर सिंह की भाँति मिलालो | अन्यथा स्मरण रखो कि मुसलमान और ईसाई रह करके वे जितनी हत्यायें करेंगे, उन सब का पाप तुम्हारे गले पर होगा | परोपकारी बनो | जगत् का भला करो | पिछड़े हुए भाईयों को प्रायश्चित से शुद्ध करके मिलाओ |

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