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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

आत्मा मन का संवाद

मन कहता है अति कठिन डगर है
कहती है आत्मा, इसमे क्या मुश्किल है
मन कहता है जब, कैसा जटिल समय‌ है
कहती है आत्मा, यह नाम स्मरण का पल है
मन रोता है, जब मुश्किल आ पड़ती है
आत्मा प्रभु मे हो लीन, ध्यान नहि धरती है
मन टुकडे टुकडे जब होने को होता
यह आत्म तत्व ही उसे जोड्,
फिर से पूरा है करता
मन भटक भटक जब जाता, व्याकुल होता
तब नाम प्रभु का एक सहारा होता
यह् आत्म तत्व के ऊपर सब निर्भर है
किस राह ले चले, अपने इस मन के रथ को
वरना तो सब गडबड् है
गहरे दुख मे सब रत है
आनन्द किरण ही आत्म तत्व का असली रथ है
जिस पर यदि वह आरूड्, मगन हर पल है