चमको चमको दयानन्द चमको
Submitted by AnandBakshi on Sat, 2006-09-16 01:59.
Swami Dayanand Saraswati
चमको चमको दयानन्द चमको, ज्ञ।न, संसार, सारे में भर दो
दूर कर दो अन्धेरा जगत से,वेद प्रकाश फैला दो जग में
अविद्या के बादलों को भगा कर, निर्भय फिर से धरा को तुम कर दो
दयानन्द का सूर्य चढ़ता रहेगा, उजाला जग में वह करता रहेगा
सोतों को वह जगाता रहेगा,तम के बादल भगाता रहेगा
शक्ति श्रधा बढाता रहेगा, निर्मल ज्योती जलाता रहेगा
प्रभु के प्यार से जग को रंग दो,ज्ञ।न प्रभु का जमाने में भर दो
कण कण में जो छाया हुआ है,तन मन में जो सबके रमा है
दिव्य ज्योती से जीवन को भर दो,
चमको चमको दयानन्द चमको, ज्ञ।न, संसार, सारे में भर दो
घोर अन्धेरा जग में था छाया,रूढियों ने था डेरा लगाया
मन की गाठों से मुक्ती दिला दो,विकृती वृतियों की मिटा दो
कर दो निर्मल हर बुधि पटल को,धार गंगा की ऐसी बहा दो
चमको चमको दयानन्द चमको, ज्ञ।न, संसार सारे में भर दो
