"सरकार किसके हाथों में"
किसे सरकार रचने का हमें अधिकार देना चाहिए
किसे भारत की सारी सम्पदा का, पाँच वर्षों के लिए अधिकार देना चाहिए
चुनें उसको जो हो काबिल, चुनें उसको तपस्वी जो
चुनें उसको जो भारत की, हर एक सम्पदा का रक्षक हो
जिसे भारत की रग रग का, और हर इक नब्ज का हो ज्ञान
जिसे भारत की हर एक बात पर, हो सदा स्वाभिमान
जिसे भारत की लुटी अस्मिता को, लौटाने कि इच्छा हो
जिसे भारत को फिर से 'सोने की चिड़िया', बनाने की हसरत हो
नहीं चाहिए हमको एक दिखलावटी भारत
जो केवल पश्चिमी देशों की करता चापलूसी हो
जो 'आर्यों' को 'विदेशी' और 'गौ मांस का भक्षक' बताता हो
जो कहता 'श्री राम' को काल्पनिक, और झूठा इतिहास घड़ता हो
जो अपनी संसकृति से अनभिज्ञ, न उसका मूल्य ही जाने
हो विदेशी झूठ से अंधा, न अपने की तड़प जिसमें
जो विदेशी वस्तुओं और विदेशी संसकृति का हो 'पिछलग्गु'
नहीं हमें ऐसा कोई भी, गुस्ताख चाहिए |
जो बेचे देश को गैरों के हाथों में, न इज्जत इसकी बचा पाए
हमें तो 'वीर' 'स्वाभिमानी', कोई 'बलवीर' चाहिए
हो जिसका खून भारत माँ की, रक्षा के लिए अर्पण
कि जिसकी 'रूह' में भारत की माटी के मिलें 'दर्शन'
नहीं नकली हमें कोई भी सरकार चाहिए
न हीं 'खानदानीं' ठेकेदारों की हमें कतार चाहिए
जो भारतियों के खून से द्रवित न होता हो
जो हजारों खून बह जाने पर भी गद्धी पे बैठा हो
जो गद्धारों को न जानें, जो गद्धारों की ही माने
नहीं ऐसा हमें कोई भी बज्जात चाहिए
हमें तो 'भारत माँ' पर फिदा जो हो, बस वही 'सरदार' चाहिए
ईमानदार चाहिए, स्वाभिमानी चाहिए !
शूरवीर, संसकारी, न्यायकारी चाहिए !
न कि कोई लाचार, पर-आश्रित, या बेकार चाहिए ||
