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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

आवाहन‌

विश्व के समस्त मानव पुत्रो! वेद सूर्य फिर उदित हुआ है. रात्री का अन्धकार अब ढल चुका है, प्रभात वेला का आगमन हो चुका है. अपने उत्थान की अनमोल वेला फिर आ गई है. वैदिक ग्यान सूर्य की किरणें अग्यान अन्धकार को दूर् करने हेतु फूट‌ पड़ी हैं जो समस्त‌ विश्व को प्रकाशित कर देंगी.
ग्यान की उत्कंठा से प्रेरित मानव पुत्रो अब निद्रा को त्याग कर इस वेद सूर्य की किरणों को अपनी मन बुद्धि पर पड़ने दो. बहुत काल निद्रा में बीत गया है. अब और आलस्य मत करो. सपनों में खोने की प्रव्रिती को अब त्याग दो.सत्य को धारण‌ करो और प्रकाश की और बड़ो. विश्व मानस को अब समझ देख उसके अनुरूप खुद को ढालो.