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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

आइये ऋषि से जानें कुछ प्रश्नों के उत्तर‌ - वेदोत्पत्तिविषयः (1)

प्रश्न - इस विषय में कितने ही पुरुष ऐसा प्रश्न करते हैं कि ईश्वर निराकार है, उससे शब्दरूप वेद कैसे उत्पन्न हो सकते हैं ?

उत्तर - इसका उत्तर यह है कि परमेश्वर सर्वशक्तिमान है, उसमें ऐसी शंका करनी व्यर्थ है, क्योंकि मुख और प्राणादि साधनों के बिना भी परमेश्वर में मुख और प्राणादि के काम करने का अनन्त सामर्थ्य है कि मुख के बिना मुख का काम और प्राणादि के बिना प्राणादि का काम वह अपने सामर्थ्य से यथावत् कर सकता है | यह दोष तो हम जीव लोगों में आ सकता है कि मुखादि के बिना मुखादि का कार्य नहीं कर सकते हैं, क्योंकि हम अल्प सामर्थ्य वाले हैं |

और इसमें यह दृष्टान्त भी है कि मन में मुखादि अवयव नहीं हैं | तथापि जैसे उसके भीतर प्रश्नोत्तर आदि शब्दों का उच्चारण मानस व्यापार से होता है, वैसे ही परमेश्वर में भी जानना चाहिये | और जो सम्पूर्ण सामर्थ्य वाला है सो किसी कार्य्य के करने में किसी का सहाय ग्रहण नहीं करता, क्योंकि वह अपने सामर्थ्य से ही सब कार्यों को कर सकता है | जैसे हम लोग बिना स‌हाय से कोई काम नहीं कर सकते वैसा ईश्वर नहीं है | जैसे देखो कि जब जगत् उत्पन्न नहीं हुआ था, उस समय निराकार ईश्वर ने सम्पूर्ण जगत् को बनाया, तब वेदों के रचने में क्या शंका रही ? जैसे वेदों में अत्यन्त सूक्ष्म विद्या का रचन ईश्वर ने किया है, वैसे ही जगत में भी नेत्र आदि पदार्थों का अत्यन्त आश्चर्यरूप रचन किया है तो क्या वेदों की रचना निराकार ईश्वर नहीं कर सकता ?

(महर्षि दयानन्द)
ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका
Q/A of HOW GOD CREATED VEDAS from MAHRISHI DAYANANDA (1)