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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

आइये ऋषि से जानें कुछ प्रश्नों के उत्तर - वेदोत्पत्तिविषयः (2)

प्रश्न - जगत् के रचने में तो ईश्वर के बिना किसी जीव का सामर्थ्य नहीं है,परन्तु जैसे व्याकरणादि शास्त्र रचने में मनुष्यों का सामर्थ्य होता है, वैसे वेदों के रचने में भी जीव का सामर्थ्य हो सकता है ?

उत्तर - नहीं, किन्तु जब ईश्वर ने प्रथम वेद रचे हैं, उनको पढ़ने के पश्चात ग्रन्थ रचने का सामर्थ्य किसी मनुष्य को हो सकता है | उसके पढ़ने और ज्ञान के बिना कोई भी मनुष्य विद्वान नहीं हो सकता | जैसे इस समय में किसी शास्त्र को पढ़ के, किसी का उपदेश सुन के और मनुष्यों के परस्पर व्यवहारों को देख के ही मनुष्यों को ज्ञान होता है, अन्यथा कभी नहीं होता | जैसे किसी मनुष्य के बालक को जन्म से एकान्त में रख के उसको अन्न और जल युक्ति से देवें, उसके साथ भाषणादि व्यवहार लेश-मात्र भी कोई मनुष्य न करे, कि जब तक उसका मरण न हो तब तक उसको इसी प्रकार से रक्खें तो मनुष्यपने का भी ज्ञान नहीं हो सकता | तथा जैसे बड़े वन में मनुष्यों को बिना उपदेश के यथार्थ ज्ञान नहीं होता, किन्तु पशुओं की नाईं उनकी प्रवृति देखने में आती है, वैसे ही वेदों के उपदेश के बिना भी सब मनुष्यों की प्रवृति हो जाती, फिर ग्रन्थ रचने की तो कथा क्या कहनी ? इससे वेदों को ईश्वर के रचित मानने से ही कल्याण है, अन्यथा नहीं |

महर्षि दयानन्द सरस्वती
(ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका)
Q/A on CREATION OF VEDAS from MAHRISHI DAYANANDA SARASWATI(2)