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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

आइये ऋषि से जानें कुछ प्रश्नों के उत्तर - वेदोत्पत्तिविषयः (4)

प्रश्न -वेदों के उत्पन्न करने में ईश्वर को क्या प्रयोजन था ?

उत्तर - मैं तुमसे पूछता हूँ कि वेदों के उत्पन्न नहीं करने में उसको क्या प्रयोजन था ? जो तुम यह कहो कि इसका उत्तर हम नहीं जानते तो ठीक है, क्योंकि वेद तो ईश्वर की नित्य विद्या है, उसकी उत्पत्ति या अनुत्पति हो ही नहीं सकती | परन्तु हम जीव लोगों के लिये जो ईश्वर ने वेदों का प्रकाश् किया है सो उसकी हम पर परम कृपा है | जो वेदोत्पत्ति का प्रयोजन है सो आप लोग सुनें |

प्र. - ईश्वर में अनन्त विद्या है व नहीं ?

उ. - है |

प्र. - सो उसकी विद्या किस प्रयोजन के लिये है ?

उ. - अपने ही लिये, जिससे सब पदार्थों का रचना और जानना होता है |

प्र. - अच्छा तो मैं आपसे पूछता हूँ कि ईश्वर परोपकार करता है वा नहीं ?

उ. ‍ ईश्वर परोपकारी है |

इससे क्या आया ? इससे यह बात आती है कि विद्या जो है सो स्वार्थ और परार्थ के लिये होती है, क्योंकि विद्या का यही गुण है कि स्वार्थ और परार्थ इन दोनों को सिद्ध करना |

जो परमेश्वर अपनी विद्या का हम लोगों के लिये उपदेश न करे तो विद्या से जो परोपकार करना गुण है सो उसका नहीं रहे | इससे परमेश्वर ने अपनी वेदविद्या का हम लोगों के लिये उपदेश करके सफलता सिद्ध करी है, क्योंकि परमेश्वर हम लोगों का माता पिता के समान है | हम सब लोग जो उसकी प्रजा हैं उन पर नित्य कृपा दृष्टि रखता है | जैसे अपने सन्तानों के ऊपर पिता और माता सदैव करुणा को धारण करते हैं कि सब प्रकार से हमारे पुत्र सुख पावें, वैसे ही ईश्वर भी सब मनुष्यादि सृष्टि पर कृपा दृष्टि सदैव रखता है, इससे ही वेदों का उपदेश हम लोगों के लिये किया है | जो परमेश्वर अपनी वेदविद्या का उपदेश मनुष्यों के लिये न करता तो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की सिद्धी किसी को यथावत् प्राप्त न होती, उसके बिना परम आनन्द भी किसी को नहीं होता | जैसे परम कृपालु ईश्वर ने प्रजा के सुख के लिये कन्द, मूल, फल और घास आदि छोटे छोटे भी पदार्थ रचे हैं सो ही ईश्वर सब सुखों का प्रकाश करने वाली, सब सत्यविद्याओं से युक्त वेदविद्या का उपदेश भी प्रजा के सुख के लिये क्यों न करता ? क्योंकि जितने ब्रह्माण्ड में उत्तम पदार्थ हैं उनकी प्राप्ति से जितना सुख होता है सो सुख विद्या प्राप्ति से होने वाले सुख से हजारवें अंश के भी समतुल्य नहीं हो सकता | ऐसा सर्वोत्तम विद्या पदार्थ जो वेद है उसका उपदेश परमेश्वर क्यों न करता ? इससे निश्चय करके यह जानना कि वेद ईश्वर के ही बनाये हैं |

महर्षि दयानन्द सरस्वती
(ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका)
Q/A on CREATION OF VEDAS from MAHRISHI DAYANANDA SARASWATI(4)