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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

वेदो में विज्ञान व शिल्पविद्या के रहस्य (5)

वायावायाहि दर्शतेमे सोमा अलंकृताः |
तेषां पाहि श्रुधी हवम् ||1||

ऋग्वेद 1|2|1||

पदार्थान्वयभाषा :-

... तथा स्पर्शादि गुणों से देखने योग्य सब मूर्तिमान पदार्थों का आधार और प्राणियों के जीवन का हेतु भौतिक वायु सब को प्राप्त होता है फिर जिस भौतिक वायु ने प्रत्यक्ष संसार के पदार्थों को शोभायमान किया है, वही उनकी रक्षा का हेतु है और जिससे सब प्राणी लोग कहने और सुनने रूप व्यवहार को कहते सुनते हैं |

भावार्थ : -

इस मन्त्र में श्लेषालङ्कार है | जैसे परमेश्वर के सामर्थ्य से रचे हुए पदार्थ नित्य ही सुशोभित होते हैं; वैसे ही जो ईश्वर का रचा हुआ भौतिक वायु है, उसकी धारणा से भी सब पदार्थों की रक्षा और शोभा तथा जैसे जीव की प्रेमभक्ति से की हुई स्तुति को सर्वगत ईश्वर प्रतिक्षण सुनता है, वैसे ही भौतिक वायु के निमित्त से भी जीव शब्दों के उच्चारण और श्रवण करने को समर्थ होता है |

(महर्षि दयानन्द सरस्वती के ऋग्वेदभाष्य पर आधारित एवं संक्षेप में उद्दृत्)
THE SECRETS OF SCIENCE & TECHNOLOGY IN VEDAS (5)
(Based on & Reproduced from Maharshi Dayanand Sarswati's RIGVED Bhashya)