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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

आइये ऋषि से जानें कुछ प्रश्नों के उत्तर - वेदोत्पत्तिविषयः (6)

प्र. - ईश्वर न्यायकारी है व पक्षपाती ?

उ. - न्यायकारी |

प्र. - जब ईश्वर न्यायकारी है तो सब के हृदयों में वेदों का प्रकाश क्यों नहीं किया, क्योंकि चारों के हृदयों में प्रकाश करने से ईश्वर में पक्षपात आता है ?

उ. - इससे ईश्वर में पक्षपात का लेश कदापि नहीं आता, किन्तु उस न्यायकारी परमात्मा का साक्षात् न्याय ही प्रकाशित होता है | क्योंकि न्याय उसको कहते हैं कि जो जैसा कर्म करे उस को वैसा ही फल दिया जाय | अब जानना चाहिये कि उन्हीं चार पुरुषों का ऐसा पूर्व‌पुण्य था कि उनके हृदय में वेदों का प्रकाश किया गया |

प्र. - वे चार पुरुष तो सृष्टि की आदि में उत्पन्न हुए थे, उनका पूर्व‌पुण्य कहां से आया ?

उ. - जीव, जीवों के कर्म और स्थूल कार्य्य ये तीनों अनादि हैं, जीव और कारणजगत् स्वरूप से अनादि हैं, कर्म और स्थूल कार्य्यजगत् प्रवाह से अनादि हैं | इसकी व्याख्या प्रमाणपूर्वक आगे लिखी जायेगी |

प्र. - क्या गायत्र्यादि छन्दों का रचन ईश्वर नें ही किया है ?

उ. - यह शंका आपको कहां से हुई ? प्र. - मैं तुमसे पूछता हूँ क्या गायत्र्यादि छन्दों के रचने का ज्ञान ईश्वर को नहीं है ?

उ. - ईश्वर को सब ज्ञान है |

अच्छा तो ईश्वर के समस्त विद्यायुक्त होने से आपकी यह शंका भी निर्मूल है |

महर्षि दयानन्द सरस्वती
(ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका)
Q/A on CREATION OF VEDAS from MAHRISHI DAYANANDA SARASWATI(6)