'पशु धन की सुरक्षा'(3) - लेखक - आर्य संन्यासी महात्मा गोपाल स्वामी सरस्वती जी

"अतः इस इक्कीसवीं शताब्दी में आर्यसमाज का लक्ष्य होना चाहिये - देश के पशुधन का संरक्षण और विकास "

अब गतांक से आगे -

"हे मांसाहारियो ! तुम लोग जब कुछ काल के पश्चात् पशु न मिलेंगे, तब मनुष्यों का मांस भी छोड़ोगे वा नहीं ? हे परमेश्वर ! तू क्यों इन पशुओं पर, जो कि बिना अपराध मारे जाते हैं, दया नहीं करता ? क्या उन पर तेरी प्रीति नहीं है ? क्या उनके लिये तेरी न्याय व्यवस्था बन्द हो गई है ? क्यों उनकी पीड़ा छुड़ाने पर ध्यान नहीं देता, और उनकी पुकार नहीं सुनता ? क्यों इन मांसाहारियों के आत्माओं में दया का प्रकाश कर निष्ठुरता, कठोरता, स्वार्थपन और मूर्खता आदि दोषों को दूर नहीं करता ? जिससे वे इन बुरे कामों से बचें |"

महर्षि दयानन्द सरस्वती
(गौकरुणानिधि से)

पशु धन के विकास हेतु कार्य योजना : -

उन्नींसवी शताब्दी की महती उपलब्धि थी महर्षि स्वामी दयानन्द का आविर्भाव और आर्यसमाज की स्थापना तथा विस्तार | बीसवीं शताब्दी की उपलब्धी थी अविद्या का नाश और विद्या की वृद्धि के लिए आर्यसमाज द्वारा संस्थागत रूप में स्कूल, गुरुकुल तथा अन्य शिक्षण संस्थायें खोलना | शिक्षा के महत्व को और प्रत्येक बालक-बालिका को शिक्षित करने की आवश्यक्ता को देश की केन्द्र और राज्य सरकारों ने अब समझ लिया है | अतः इस इक्कीसवीं शताब्दी में आर्यसमाज का लक्ष्य होना चाहिये - देश के पशुधन का संरक्षण और विकास | इसके लिये उचित होगा कि संस्थागत रूप में आर्यसमाज निम्न कार्य-योजना (Action Plan) को क्रियान्वय‌न करने का पूर्ण प्रयास करे |

वैदिक विधि से होने और कराये जाने वाले विवाह संस्कारों में दान-दहेज के बजाय 'कन्या-दान' से पूर्व केवल 'गोदान' ही सस्कार विधि के अनुसार वास्तविक रूप में कन्या पक्ष की ओर से वर-पक्ष को करवाया जाये | आर्य पुरोहोतों को यह दायित्व लेना होगा | कन्या अपने पतिगृह में गौ के साथ ही प्रवेश करे | यदि वर या वर-पक्ष गाय-पालन में स्थनाभाव या अन्य किसी कारण से असमर्थ हों, तो बेशक गाय को स्थानीय गोशाला को दान कर दिया जावे और यथा-शक्ति गौशाला को गोपालन हेतु आर्थिक सहयोग प्रतिमाह या प्रतिवर्ष दिये जाने की वचन-बद्धता हो |

देश में प्रत्येक ग्रामीण क्षेत्र की आर्यसमाज अपने-अपने क्षेत्र में गौशाला या पशुशाला स्थापित करें, जहां पर पशुओं के पशु-चिकित्सा की समुचित व्यवस्था हो | प्रत्येक आर्यसमाज के साथ सम्बद्ध गौशाला या पशुशाला हो | प्रत्येक आर्य सदस्य को शुद्ध दूध लागत मूल्य पर प्राप्त हो सके, यह लक्ष्य होना चाहिये | यदि दूध का उत्पादन इतना हो, कि घृत भी बनाया जा सके, तो और भी अच्छा है | यज्ञ-हवन में आहुतियाँ आर्य समाज की अपनी ही गौशाला के दूध से बने घृत से पड़नी चाहियें |
नगरों या महानगरों में बड़ी आर्य समाजें मिलकर या अपने बल-बूते पर ही एक सहयोगी स‍स्था (Subsidiary Organisation) का निर्माण करें, जिसका नाम हो - गोकृष्यादिरक्षिणी सभा | प्रत्येक जिला सभा का यह दायित्व होना चाहिये कि नगरों में जितनी समाजें हैं, उतनी ही कम से कम गोकृष्यादिरक्षिणी सभा गठित हों | इन सभाओं का विधान, नियम, उपनियम सब महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती ने अपनी अन्तिम कृति "गौकरुणानिधि" में निर्धारित कर दिये हैं | उन्हीं के आधार पर इन सभाओं का गठन किया जा सकता है | इन सभाओं का यह दायित्व होगा कि वे नगर निगमों की स्वीकृति से गौशाला व पशुशाला के लिये पर्याप्त भूमि का अधिग्रहण कर गौशालायें/पशुशालायें आधुनिक ढंग पर स्थापित करेंगी, जिनमें जहाँ एक ओर पशुओं के आवास, आराम, आहार,चिकित्सा की सब आधुनिक सुविधायें तो होंगी ही, दूध से निर्मित उत्पादों का निर्माण, वितरण तथा विक्रय भी होगा, जैसे घी, मावा, पनीर, मट्ठा, दही आदि | लक्ष्य यह होना चाहिये कि प्रत्येक गौशाला आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर हो |

अर्यसमाज की जो सभायें प्रादेशिक या सार्वदेशिक स्तर पर कार्यरत हैं, उनको इतने कार्य तो अपने-‍अपने स्तर पर पूर्ण निष्ठा और सक्रियता से करने और करवाने ही चाहियें -
(1) पशुपालन और डेयरी (Animal Husbandry & Dairy Farming) को उद्योग का दर्जा दिया जावे | जो सरकारी सुविधायें नये उद्योग को करने में मिलती हैं, वे सब सुविधायें पशुपालन और डेयरी उद्योग‌ को प्राप्त हों |

(2) पशुपालन और डेयरी उद्योग को बैंकों से ऋण प्राप्त करने में प्राथमिक्ता और सस्ती ब्याज दरों की सुविधा हो |

(3) किसी भी समुदाय के महत्वपूर्ण पर्व/त्योहार पर मद्य और माँस दोनों का उत्पादन तथा क्रय-विक्रय प्रतिबन्धित हो | 'गाँधी' 'गौतम बुद्ध' और 'महावीर' के देश में किसी भी समुदाय के महत्वपूर्ण पर्वों/त्योहारों पर "पशु हिंसा" किसी भी सूरत में नहीं होनी चाहिये | सभी को "अहिंसा परमो धर्मः" के अनुसार धर्म-पूर्वक जीवन-यापन करना चाहिये |

(4) जिस प्रकार जंगली और हिंसक पशुओं की सुरक्षा के लिये Wild Life Protection Act कानून है उसी प्रकार का कानून Domestic Animals Preservation & Protection Act उपयोगी घरेलू पशुओं के लिये होना चाहिये |

(5) जिस प्रकार प्राणी (मनुष्यों) में आत्मा है, उसी प्रकार पशुओं में भी आत्मा है | जिस प्रकार मनुष्य की हत्या दण्डनीय अपराध है, उसी प्रकार उपयोगी घरेलू पशुओं की हत्या भी दण्ड‌नीय अपराध की श्रेणी में होनी चाहिये | प्रत्येक जीवित प्राणी को अपनी आयु तक जीवित रहने का संवैधानिक एवं मौलिक अधिकार हो, चाहे वह मनुष्य हो या उपयोगी पशु | घरेलू और उपयोगी पशु हमेशा अपने मालिक के वफादार रहे हैं, जबकि इस मनुष्य रूपी प्राणी ने, अपने ही लोगों से वेवफाई के रिकार्ड बनाये हुये हैं, अतः अधिकारों के मामले में बेवफा को बावफा पर तरजीह (वरीयता) देना न्यायसंगत नहीं | यहाँ पर भारत के उच्चतम न्यायलय के एक पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री कृष्ण अय्यर के कथन को उद्धृत करना ठीक होगा जिन्होंने एक पशु संरक्षण गोष्ठी में स्वयं कहा था, कि "पशुओं को भी जीने का जन्म सिद्ध अधिकार है | मेरी राय में पशु हत्या और मनुष्य हत्या में कोई भेद नहीं है |" आर्य समाज की सभाओं के शीर्षस्थ नेता, जिन्हें कोर्ट/कचहरी में जाने का बहुत शौक है, पशु धन की सुरक्षा पर सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका तो डालकर देखें, ऋषिवर दयानन्द की गौकरुणानिधि पुस्तक में दी गई उक्तियाँ ही सफलता की प्राप्ति में पर्याप्त होंगी, मात्र कानूनी उक्तियों के लिये ही पुरुषार्थ करना होगा | वैसे भी भारत के संविधान की धारा 49 का स्पष्ट निर्देश है -

"राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों द्वारा संचालित करने का प्रयास करेगा, विशेषतः गायों तथा अन्य दुधारू और वाहक पशुओं के परिरक्षण और सुधार के लिये और उनके वध को प्रतिबन्धित करने के लिए कदम उठायेगा |"

आर्य समाज संस्थागत रूप में अपने प्रवर्तक महर्षि स्वामी दयानन्द की अन्तिम कृति 'गोकरुणानिधि' की भावना के अनुरूप तथा यजुर्वेद के प्रथम अध्याय के प्रथम मन्त्र के अनुरूप 'पशून पाहि' पशुओं की रक्षा का दायित्व इस इक्कीसवीं शताब्दी में आगामी पीढ़ी की आवश्यक्ताओं को ध्यान में रखते हुए ले, यही इस अकिंचन, क्षुद्र किन्तु विनम्र संन्यासी की अन्तिम इच्छा है |

||ओउम् शम्||

निवेदक :
आर्य संन्यासी महात्मा गोपाल स्वामी सरस्वती
(आर्य वानप्रस्थाश्रम)
आर्य समाज बी ..69, सैक्टर 33,
नोएडा - 201301
(दूरभाष)0‍-9818583178

Hindi typing

English

Hinglish Typewriter
see map


Hindi Typewriter
(Mangal font) see map

Krutidev Typewriter
see map

If you see square boxes and don't see Hindi when you type, then click here.

English to Hindi dictionary