उलटी गंगा
बहुत बहाई उलटी गंगा, अब सीधी बहने दो
सावधान हो जाओ अब सब, अब प्रभात आने दो
उलटी गंगा कैसे बहनी शुरू हुई, तुम सोचो तो
कब से बह रही यह उल्टी, थोड़ा बहुत विचारो तो
उल्टा, सीधे का उल्टा है, सीधा उल्टे का उल्टा
इतना सा ही राज है इसमें, अधिक नहीं तुम सोचो तो
पूँछ पकड़ हम आज चल रहे, अब लगाम को पकड़ो तो
बाहर को हम झाँक रहे हैं, भीतर को क्यों भूले हो
पलभर बाहर को छोड़ो अब, भीतर रोशन होने दो
तन में अपने कचरा डाला, तन शमशान बनाया है
तन में मांसाहार डालकर, कब्रिस्तान बनाया है
तन अशुद्ध जब हुआ तो उसने प्राणों को बरबाद किया
प्राणों का क्रम टूटा जब, तब मन सारा ही बिखर गया
बिखरे मन में दूषित कितने संस्कार्रों का वास हुआ
बुद्धि भ्रष्ट हुई फिर सबकी, जीवन सब बर्बाद हुआ
तन,प्राण मन बुद्धि नें अपनी ही रूह को ढाँप लिया
और सभी रूहोँ ने मिलकर,अपने प्रभु को ही बाँध दिया
अब गर प्रभु को पाना हो तो, पहले दुष्टों को पूजो
दुष्टों पर विश्वास जमाओ, तब केवल प्रभु की सोचो
कैसी उल्टी गंगा देखो, इस दुनिया में बहती है
जो कचरा सारे गटरों का, सबके दिल में भरती है
आओ दुनिया को सम्भाल लें, उल्टी को उल्टा कर दें
अब पुकार भीतर की सुन लें खुद को अब आजाद करें
आज प्रभु दे रहा प्रेरणा, अपने कितने भक्तों से
कान खोल कर सुनें उसे हम, अपने तन मन प्राणों से
प्रभु प्रेरणा को जब फिर से सुनना शुरू करेंगे हम
आत्म शक्ति से भरकर तब, मन पर विजय करेंगे हम
प्राणायाम का मन्त्र है ऐसा, मन को शुद्ध यह करता है
आत्म शक्ति को जागृत कर , जीवन में सुख भरता है
मन पर विजय पानी हो जब , मन के बिन्दु पर क्लिक करना
मन सारे को केन्द्र बिन्दु से, फिर संचालित तुम करना
मन को खाली करना हो जब,तुमको सन्ध्या से पहले
चञ्चल मन पर विजय मिलेगी, ओउम नाम के ही जप से
ओउम गुणों का जाप भी, मन को शुद्ध बना देता है
इसीलिए तुम ओउम् नाम से, इसको झँकृत करना
मन प्राणों को झँकृत कर, तब तन को शुद्ध करेगा
सारा तन मन प्राण बुद्धि तब, ओउम् से झँकृत होगा
शुद्ध हुआ जब तन अपना तो शुद्ध विचार बनेंगे
फिर उत्तम होंगे कर्म हमारे, उत्तम चरित्र उभरेंगे ||