Arya Samaj - Satyarth Prakash Samiksha

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Know The Reality Of Satyarth Prakash

आर्य का अर्थ है श्रेष्ठ तथा समाज का अर्थ है समुदाय. जो शराब, माँस, तंबाखू आदि का सेवन नहीं करता हो तथा चोरी, जारी, झूठ कपट से दूर हो वह समुदाय आर्य समुदाय कहलाता है तथा जो आर्य समाज के दस नियमों का पालन करता हो जिसमे चौथा नियम है- सत्य को ग्रहण करो, असत्य का परित्याग करो. जो अपने आपको आर्य समाज़ी कहते हैं वे आँखों देख कर भी सत्य को ग्रहण नहीं कर रहे कि वास्तव में दयानंद सरस्वती और उनका सत्यार्थ प्रकाश का ज्ञान सत्यार्थ वेद ज्ञान विरुद्ध तथा मिथ्या आलोचनाओं का पुलंदा है. जैसे कि सत्यार्थ प्रकाश समुल्लास 8 पृष्ठ 197-198 में लिखा है कि सूर्य पर मनुष्य रहते हैं और वे वहाँ वेदों को पढ़ते हैं... समुल्लास 4 पृष्ठ 71 में लिखा है 24 वर्ष की स्त्री और 48 वर्ष के पुरुष का विवाह उत्तम है आदि-आदि इस विडियो श्रंखला मे सत्यार्थ प्रकाश प्रत्यक्ष दिखाया जाएगा जिससे शिक्षित वर्ग स्वयं निर्णय ले क्या सही है और क्या ग़लत.

स्वामी दयानंद सरस्वती ने सत्यार्थ प्रकाश के पृष्ठ 342 समुल्लास 12 की अनुभूमिका में लिखा है कि- "जब तक वादी-प्रतिवादी हो कर प्रीति से वाद वा लेख ना किया जाए तब तक सत्य-असत्य का निर्णय नहीं हो सकता. सत्य के जय और असत्य के क्षय के लिए मित्रता से वाद वा लेख करना हमारी मनुष्य जाति का मुख्य काम है. यदि ऐसा ना हो तो मनुष्य जाति की कभी उन्नति नही हो सकती". (लेख समाप्त)

सतलोक आश्रम के संचालक संत रामपाल जी ने भी यही उपकार किया है. समाचार पत्रों के माध्यम से लेख लिख कर सत्यार्थ प्रकाश की त्रुटियो को उजागर किया है जो मानव मात्र के कल्याणार्थ हैं. आर्य समाज के आचार्यों ने ज्ञान का उत्तर ज्ञान से ना देकर संत रामपाल जी पर बेहूदे आरोप लगाए तथा मारने का षड्यंत्र रचा ताकि महर्षि दयानंद के अज्ञान की पोल ना खुल जाए. शिक्षित समाज स्वयं इस पूरी श्रंखला को निष्पक्ष रूप से देखकर निर्णय ले और महर्षि दयानंद जी की शिक्षानुसार सत्य को ग्रहण कर असत्य का परित्याग करे.

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Tamaso ma jyotirgamaya...Let me go to light from darkness .
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