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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

महर्षि दयानन्द कृत आर्याभिविनयः से (36)

स्तुति विषय

सोम गीर्भिष्ट्वा वर्द्धयामो वचोविदः |
सुमृडीको न आ विश ||36||

व्याख्यान

हे "सोम" सर्वजगदुत्पादकेश्वर ! आपको "वचोविदः" शास्त्रवित् हम लोग स्तुति-समूह से "वर्द्धयामः" सर्वोपरि विराजमान मानते हैं | "सुमृडीकः, नः, आविश‌" क्योंकि हमको सुन्दर सुख देने वाले आप ही हो, सो कृपा करके हमको आप आदेश करो, जिससे हम लोग अविद्यान्धकार से छूट और विद्यासूर्य को प्राप्त होके आनन्दित हों ||36||

From MAHARSHI DAYANAND SARASWATI's 'ARYABHIVINAY'