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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

महात्मा नारायण स्वामी जी की 'केन सूक्त' पर टीका - ‍परिशिष्ट (3)

को अस्मिन्नापो व्यदधाद् विषूवृतः पुरूवृतः सिन्धुसृत्थाय जाताः |
तीव्रा अरुणा लोहिनीस्ताम्रधूम्रा ऊर्ध्वाः अवाचीः पुरुषे तिरश्चीः ||11||

अर्थः -(अस्मिन् पुरुषे) इस मनुष्य में (वि+सु+वृतः) विशेष घूमने वाले, (पुरुवृतः) सर्वत्र घूमने वाले (सिन्धु सृत्याय जाताः) नदी के समान बहने के लिए बने हुए (अरुणाः, लोहिनीः, ताम्रधूम्राः, ऊर्ध्वाः, अवाची, तिरश्चीः, तीव्राः) लाल रंग वाले, लोहे को साथ ले जाने वाले, ताँबे के धुएँ के समान रंग वाले, ऊपर, नीचे और तिरछे, वेग से चलने वाले, (अपः कः व्यदधात्) जल (रक्त) प्रवाह किसने बनाए हैं ?

को अस्मिन्रूपमदधात् को माह्मनं च नाम च |
गातुं को अस्मिन् कः केतुं कश्चरित्राणि पुरुषे ||12||

अर्थः - (अस्मिन् रूपं अदधात्) इसमें रूप‌ किसने रक्खा है ? (माह्मनं च नाम च कः अदधात्) महिमा और नाम किसने रक्खा है ? (अस्मिन् गातुं कः) इसमें गति किसने रक्खी है ? (कः केतुं) किसने ज्ञान रक्खा है ? (पुरुषे च‌रित्राणि कः अदधात्) मनुष्य में चरित्र किसने रक्खा है ?

को अस्मिन् प्राणमवयत को अपानं व्यानमु |
समानमस्मिन् को देवोSधिशिश्राय पुरुषे ||13||

अर्थः - इस (पुरुष) में किसने प्राण किसने अपान और व्यान की रचना की है ? इस पुरुष‌ में किस देव ने समान को ठहराया है ?

को अस्मिन् यज्ञमदधादेको देवोSधि पुरुषे |
को अस्मिन्त्सत्यं को अनृतं कुतो मृत्युः कुतोSमृतम् ||14||

अर्थात् किस एक देव ने इस पुरुष में यज्ञ (शुभकर्म) किसने, सत्य और असत्य को रख दिया है ? कहाँ से मृत्यु और कहां से अमरत्व आता है ?

को अस्मै वासः पर्यदधान् को अस्यायुरकल्पयत् |
बलं को अस्मै प्रायच्छत् को अस्याकल्पय‌ज्जवम् ||15||

अर्थात् इसके लिए (वासः) शरीर रूपी वस्त्र किसने दिया है ? इसकी आयु किसने संकल्पित की है ? इसको बल किसने (प्रायच्छत्) दिया है ? (अस्य जवं क:ह् अकल्पयत्) इसकी जब = स्फूर्ती को किसने रचा है ?

केनापो अन्वतनुत केनाहरकरोद् रुचे |
उषसं केनान्वैन्द्ध केन सायंभवं ददे ||16||

अर्थात् (केन आपः अन्वतनुत) किसने जलों को फैलाया ? (केन अहः रुचे अकरोत्) किसने दिन प्रकाश के लिए बनाया ? (केन उषसं अन्वैन्द्ध) किसने ऊषा को चमकाया ? (केन सायंभवं ददे) किसने सा‍यंकाल दी ?

(क्रमशः)

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Reply of Mr.AnandBakshi ji

Reply of Mr.AnandBakshi ji to Mr Rajesh paul is very encouraging.I believe that vedic thoughts can lead us to achieve ultimate goal of life.Arya Samaj can play constructive role to remove evils in our society