पशु कहे कसाई से

पशु कहे कसाई से, तू क्या काटे मोहे
अपनी खैर मनाना तुम, जब मैं काटूंगा तोहे

इस जनम मैं पशु बना, बना आदमी तू
अगले जनम उल्टा होगा, मैं नर और पशु तू

खाता मेरे माँस को, बनता मानव तू
माँस तेरा मैं खाउँगा, पशु बने जब तू

करनी अपनी सुधार ले, छोड़ दे अत्याचार
बन मानव बुद्धि से काम ले, सब पशु पक्षी करें पुकार

हम तो प्रभु की मानकर, करते अपने काज
तू ही उल्टी बुद्धि रख, करता अत्याचार

सीधा सच्चा नियम यह, सुख दिये सुख होय
दुख मिले भीषण उसे, जो दुख दूजों को देय

खाने को सब कुछ धरा, जितना चाहे खाए
पर अपने खाने हित तू, दूजों को काहे सताए

वक्त रहे तू मान जा, न बाद में तू पछताए
गाड़ी अपने हाथ से, जब प्राण की छूटी जाए ||

श्री आनंद

श्री आनंद जी ,
नमस्ते ।
मांसाहार में रुचि रखने वालों के लिए मनन करने योग्य यह उत्तम कविता है ।
चिंता मणि वर्मा

नमस्ते

नमस्ते श्री चिंता मणि वर्मा जी
शायद कोई माँसाहारी अपनी बुद्धि को जब टटोलेगा और हृदय पर ध्यान धरेगा तब उसको अपनी इस क्रिया पर पश्‍चाताप होगा, ऐसी ही कामना के साथ यह कुछ पंक्तियाँ लिखीं हैं | सराहना के लिए आभारी हूँ |
आनन्द‌

नमस्ते

नमस्ते श्री चिंता मणि वर्मा जी
शायद कोई माँसाहारी अपनी बुद्धि को जब टटोलेगा और हृदय पर ध्यान धरेगा तब उसको अपनी इस क्रिया पर पश्‍चाताप होगा, ऐसी ही कामना के साथ यह कुछ पंक्तियाँ लिखीं हैं | सराहना के लिए आभारी हूँ |
आनन्द‌

Hindi typing

English

Hinglish Typewriter
see map


Hindi Typewriter
(Mangal font) see map

Krutidev Typewriter
see map

If you see square boxes and don't see Hindi when you type, then click here.

English to Hindi dictionary