ओउम् ओउम् बोल भई ओउम् ओउम् बोल
हो गया अब तेरा डब्बा गोल
अब तो प्यारे ओउम् तू बोल
ओउम् ओउम् बोल, भई ओउम् ओउम् बोल
ओम् ओम् बोल, बाबा ओम् ओम् बोल
चोर लुटेरे लूट गये सब
अब तो बच गया बाकी खोल
ओउम् ओउम् बोल, भई ओउम ओउम बोल
ओम् ओम् बोल, बाबा ओम् ओम् बोल
ओउम् ओउम् बोल, तेरा लगे न मोल
बढ़ जाएँगे तेरे मोल
ओउम् ओउम् बोल, भई ओउम् ओउम् बोल
ओम् ओम् बोल, बाबा ओम् ओम् बोल
ओउम् नहीं बोलेगा, तो और कुछ बोलेगा
ओउम को न चाहेगा, तो और कुछ चाहेगा
ओम् नहीं पाएगा, तो और कुछ पाएगा
बिना ओम् नाम के, तू व्यर्थ मारा जाएगा
साथ कुछ न जाए तेरे, ओउम नाम जाएगा
उसको ही बिसराएगा , तो सुख कैसे पाएगा
ओउम् तेरे बाहर भी है, ओउम् तेरे भीतर भी
आँख बन्द कर देख , ओउम् ओउम् ओउम् ही
ओम् है आधार सबका, ओम् प्राणाधार है
ओम् है आनन्द, ओम् शक्ति का भण्डार है
बिना ओउम् ढूंढ रहा, किस संसार को
जड़ता में खोज रहा, प्यार के भण्डार को
छूट जाए तन तेरा, छूट जाए धन भी
छूट जाएं साथी तेरे, छूट जाए मन भी
राह होगी सुनसान, कुछ भी न पाएगा
एक ओउम् नाम, बस राह दिखाएगा
वक्त रहते मान जा तू, वक्त रहते जान जा
वक्त बीत जाएगा, तो लौट के न आएगा
बुद्धि दी भगवान ने, है ज्ञान वेद साथ में
काहे तू भटकता फिरता, दुनिया के अज्ञान में
वेद ज्ञान त्याग कर, सुख नहीं पाएगा
अन्धेरे में बार बार, ठोकरें ही खाएगा
पाप दुराचार को, गर जान ही न पाएगा
कैसे अपने पाँव, दलदल से हटाएगा
अमृत को पाना है, तो ओउम् से ही पाएगा
बिना ओम् नाम बावले, व्यर्थ मारा जाएगा ||
नमस्ते
नमस्ते श्री चिन्तामणि वर्मा जी
आपने जो सराहना की है कविता की, वह तो मैं नहीं जानता कितनी वह उसकी हकदार है, लेकिन मेरी टूटी फूटी कविता की सराहना के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद | ईमेल पता मै आपको भेज रहा हूँ, वैसे नाम पर क्लिक कर फिर कान्टैक्ट पर क्लिक करने से शायद हम किसी भी सदस्य से ईमेल का आदान प्रदान कर सकते हैं ?
आप सभी को अनेक शुभकामनाएँ |
आनन्द

नमस्ते
नमस्ते ,
श्री आनंद जी ।
बहुत अच्छी कविता है ।
पढ़ने ,गुनगुनाने और मनन करने योग्य कविता है ।
चिंता मणि वर्मा
क्या मैं आपका इ मेल पता जान सकता हूँ ?