जिन प्यार कियो तिन परमेश्वर पायो
Submitted by Rohitaryan on Tue, 2009-12-29 10:29.
प्यार शब्द का सम्बन्ध इन्सान के दिल एवं उसमें उठते हुए शुभ विचारों से होता है। अशुभ विचारों का प्यार शब्द से कोइ सम्बन्ध नही। व्यक्ति का व्यक्ति के साथ लगाव तभी होता है जब प्यार होता है। प्यार जगता है उसी दिल में, वहीं पैदा होती है चाहत, जहाँ शुद्ध विचार होते हैं क्योकि जहां दिल में विचार शुद्ध नही होते वहां प्यार एवं चाहत कभी नही हो सकते। इस तरह के भाव को प्यार कहना ही महाभूल होती है। इसे प्यार नही वासना कहते है। क्या मेरे मित्र मेरी इस चाहत एवं प्यार को ध्यान में रखेंगे या फिर इन पवित्र भावों को वासना से भरे दिल अपवित्र करते रहेंगे। प्यार एवं चाहत के पवित्र भाव हमें देवत्व की ओर ले जाते हैं।
Rohit Arya (Arsh Gurukul Noida)

हम सभी को
हम सभी को आपस में प्यार भाव से रहना चाहिए।
Rohitaryan(Arsh Gurukul Noida)