नव वर्ष - 2010
वर्ष बदलता है तब हम भी बदलें
अंक बारहवां छोड़, एक पर वापिस लौटें
वरना सुई, इसी अंक पर अड़ी रहेगी
आगे ,जब नही राह, यहीं पर खड़ी रहेगी
व्यर्थ रीतियों और नीतियों को अब छोड़ें
नई राह और नए नए पथ को हम पकड़ें
धुन पुरानी चाहे कितनी मन को भाये
छोड़ें इसे, नई निराली तर्ज बनाएं
अंक एक से ,नई एकता को घर लायें
बारह का व्यापार छोड़, सब होश में आएं
कदम जो पहला, प्रथम अंक से आगे रख्खें
हो जीवन से भरपूर, नई शक्ति वह लाये
नई उमंगें, नई तरंगें, नये नये विसमय वह लाये
आज तलक जो संम्भव न था
वह सब संम्भव कर दिखलायें
ध्यान दूसरों की गलती पर अब न जाए
ध्यान धरें अपने छिद्रों पर ,उनको पाटें
नए वर्ष में नए गुलाब के पौधे रौपें
नये सुगन्धित फूलों से बगिया को भर लें
भ्रमण हेतु, प्रात: उठने का क्रम बनाएं
बिन कसरत और बिना योग खाना न खायें
करें अवष्य वह काम ,पेट जो पूरा पाले
हो बुद्धि से काम ,कभी न होवें घाटे
मन की तरंग को, सुर से झंकृत यदि कर पाओगे
मनोवाञ्छित फल, वर्ष भर पाओगे
सुख ऐसा दे ! तुम करो प्रार्थना जगदम्बा से
हर्षित मन , पुलकित तन
बढ़ चलें, हम सबसे आगे !!
सभी आर्यों को नए वर्ष की शुभ कामनाओं सहित
आनन्द
